'आ गए, मेरी मौत का तमाशा देखने...' नाना पाटेकर के दमदार डायलॉग्स; आज भी सबकी जुबान पर
नाना पाटेकर ने अपनी एक्टिंग से हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई, जिसमें उनकी आवाज और डायलॉग डिलीवरी का अंदाज सबसे अलग नजर आया.
नई दिल्ली: नाना पाटेकर जब पर्दे पर आते थे तो सिर्फ किरदार नजर नहीं आता था, बल्कि उनकी आवाज और डायलॉग बोलने का अंदाज भी कहानी का अहम हिस्सा बन जाता था. गुस्से से भरे पुलिस अधिकारी हों, बेबाक इंसान हों या फिर खतरनाक गैंगस्टर, नाना ने हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ी. उनके डायलॉगों में कभी व्यवस्था पर सवाल था, कभी देश की चिंता और कभी दुश्मन के सामने सीधा चुनौती देने वाला तेवर.
अब उनके निधन की खबर ने उनके प्रशंसकों को भावुक कर दिया है. 75 साल की उम्र में अभिनेता के निधन की जानकारी सामने आई है. शुरुआती जांच में गंभीर कार्डियक अरेस्ट की बात सामने आई. अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें होश में लाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. ऐसे वक्त में उनकी फिल्मों के चर्चित डायलॉग एक बार फिर उनके प्रशंसकों को उनके दमदार अभिनय की याद दिला रहे हैं.
‘यशवंत’ में एक मच्छर वाला डायलॉग हुआ अमर
1997 में आई फिल्म ‘यशवंत’ में नाना पाटेकर ने ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई थी. फिल्म में उनका गुस्सा और बेबाक अंदाज खूब पसंद किया गया. इसी फिल्म का डायलॉग ‘एक मच्छर... साला एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है’ बेहद चर्चित हुआ. इसी फिल्म का एक और डायलॉग ‘100 में से 80 बेईमान, फिर भी मेरा देश महान...’ भी उनकी पहचान से जुड़ गया.
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‘क्रांतिवीर’ में दिखा देश और समाज का गुस्सा
1994 की ‘क्रांतिवीर’ नाना पाटेकर के करियर की यादगार फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म में उनके कई डायलॉगों ने दर्शकों पर गहरा असर छोड़ा. फांसी के दृश्य में उनका डायलॉग ‘आ गए!!! मेरी मौत का तमाशा देखने...’ खूब चर्चित हुआ. इसी फिल्म में उनका डायलॉग ‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून... बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा... बता’ भी सांप्रदायिक सोच पर सवाल उठाने वाले दृश्यों में याद किया गया.
‘तिरंगा’ में पुलिस अफसर का अलग अंदाज
1992 में आई ‘तिरंगा’ में नाना पाटेकर ने पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई थी. फिल्म में उनका किरदार गुंडों से भिड़ता नजर आया और उनके डायलॉगों ने दर्शकों का उत्साह बढ़ाया. ‘अपना तो उसूल है... पहले लात, फिर बात उसके बाद मुलाकात’ उनका चर्चित डायलॉग बना. इसी फिल्म का एक और आक्रामक डायलॉग ‘तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तेरी पापी आत्मा अगले सात जन्म तक किसी दूसरे शरीर में घुसने से पहले कांप उठेगी’ भी लंबे समय तक चर्चा में रहा.
‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ में गैंगस्टर बनकर छाए
1997 में आई ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर का किरदार निभाया था. इस भूमिका में उनका अंदाज पहले की फिल्मों से अलग दिखाई दिया. किरदार की कठोरता और डायलॉग अदायगी ने फिल्म को यादगार बनाने में भूमिका निभाई. इसी फिल्म का डायलॉग ‘बेहतर है तू अपना इरादा बदल दे, नहीं तो मैं तेरा नक्शा बदल दूंगा’ उनके आक्रामक अंदाज की मिसाल बन गया. इस डायलॉग में उनका वही तेवर दिखाई दिया, जिसके लिए वह पहचाने जाते थे.
एक आवाज, कई किरदार और याद रह गए डायलॉग
नाना पाटेकर की खासियत सिर्फ ऊंची आवाज में डायलॉग बोलना नहीं थी. वह अपने अभिनय के जरिए शब्दों के पीछे छिपे गुस्से, दर्द और भावनाओं को भी सामने ले आते थे. ‘क्रांतिवीर’ में डिंपल कपाड़िया के साथ बहस के दौरान उनका डायलॉग ‘जो लोग गीता रामायण कुरान पढ़कर नहीं जागे, तुम्हारा अखबार पढ़कर कौन सी क्रांति लाएंगे?’ भी चर्चित रहा. यही वजह है कि उनके कई डायलॉग फिल्मों से बाहर निकलकर आम बातचीत का हिस्सा बन गए.