35 साल बाद भारत की सॉवरेन रेटिंग A- हुई, जानें वजह और इससे क्या होगा फायदा
JCRA ने भारत की सॉवरेन रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी है. 35 साल बाद भारत को A कैटेगरी मिली है जबकि Big Three एजेंसियां अभी पीछे हैं.
जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCRA) ने बुधवार को भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी. इसके साथ भारत 35 साल से ज्यादा समय बाद फिर A-रेटेड देशों के क्लब में पहुंच गया है. पिछली बार 1988 में Moody’s ने भारत को A2 रेटिंग दी थी.
1990-91 संकट के बाद खत्म हुई थी A रेटिंग
भारत की A- रेटिंग 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के बाद खत्म हो गई थी. उस समय विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव आया था और देश के सामने डिफॉल्ट का खतरा पैदा हो गया था. अब JCRA ने मजबूत आर्थिक वृद्धि, प्रभावी नीतियों, घरेलू खपत, सरकारी निवेश और वित्तीय व्यवस्था में सुधार को रेटिंग बढ़ाने की प्रमुख वजह बताया है.
2025 में भी मिली थीं तीन रेटिंग अपग्रेड
JCRA का फैसला ऐसे समय आया है जब भारत को 2025 में तीन अन्य अंतरराष्ट्रीय रेटिंग अपग्रेड भी मिले थे. Morningstar DBRS ने मई, S&P Global Ratings ने अगस्त और जापान की R&I ने सितंबर 2025 में भारत की रेटिंग बढ़ाई थी. S&P का अपग्रेड खास था, क्योंकि एजेंसी ने करीब 18 साल बाद पहली बार भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई थी.
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7.8% GDP ग्रोथ और मजबूत निवेश
अप्रैल-जून 2026 यानी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP 7.8% बढ़ी. निजी क्षेत्र के पूंजी निवेश में सालाना आधार पर 11.9% की वृद्धि हुई, जबकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण GDP के 34.3% तक पहुंच गया. बैंकिंग क्षेत्र में भी सुधार हुआ है और JCRA के अनुसार बैंकों का गैर-निष्पादित ऋण यानी NPA अनुपात 2% से नीचे आ गया है.
दुनिया की टॉप-3 रेटिंग एजेंसियां अभी भी सहमत नहीं
इसके बावजूद दुनिया की तीन प्रमुख रेटिंग एजेंसियों—S&P, Moody’s और Fitch—की रेटिंग JCRA से कम है. Fitch ने भारत को 2006 से BBB- पर रखा है. Moody’s की रेटिंग Baa3 है, जो उसकी निवेश-योग्य श्रेणी का सबसे निचला स्तर है. S&P ने अगस्त 2025 में भारत की रेटिंग BBB- से बढ़ाकर BBB की थी.
तेज विकास के बावजूद कर्ज बड़ी चुनौती
रेटिंग एजेंसियां भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को स्वीकार करती हैं, लेकिन सार्वजनिक कर्ज और सरकारी वित्तीय स्थिति को बड़ी चुनौती मानती हैं. Fitch के मुताबिक FY27 में भारत की अनुमानित 6.4% वृद्धि BBB रेटिंग वाले देशों के औसत से काफी ज्यादा होगी. फिर भी सरकारी कर्ज और कर्ज चुकाने का बोझ रेटिंग पर दबाव डालता है.
रेटिंग बढ़ने से क्या फायदा होगा?
सॉवरेन रेटिंग किसी देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से कर्ज लेने की लागत को प्रभावित करती है. बेहतर रेटिंग का मतलब आम तौर पर कम जोखिम प्रीमियम होता है. इसका फायदा सरकार के साथ भारतीय बैंकों और कंपनियों को भी मिल सकता है, क्योंकि विदेशी निवेशक देश की साख को उनकी क्रेडिट क्षमता के आकलन में एक संदर्भ के रूप में देखते हैं.
बैंकों और कंपनियों तक पहुंचता है असर
इसका उदाहरण 2025 में देखने को मिला. S&P द्वारा भारत की रेटिंग बढ़ाए जाने के बाद एजेंसी ने 10 भारतीय वित्तीय संस्थानों की रेटिंग भी बढ़ाई थी. इनमें सात बैंक और तीन वित्त कंपनियां शामिल थीं. इससे बेहतर रेटिंग का असर भारतीय संस्थानों की विदेशी फंडिंग और निवेश क्षमता तक पहुंचने का संकेत मिलता है.
A रेटिंग सिर्फ प्रतिष्ठा का मामला नहीं
भारत के लिए यह अपग्रेड केवल प्रतिष्ठा की उपलब्धि नहीं है. बेहतर सॉवरेन रेटिंग लंबे समय में विदेशी पूंजी की लागत और जोखिम प्रीमियम को कम करने में मदद कर सकती है. हालांकि, आर्थिक सर्वे के विश्लेषण के मुताबिक रेटिंग बदलाव और सरकारी बॉन्ड यील्ड, रुपये की विनिमय दर या शेयर बाजार के रिटर्न के बीच सीधा मजबूत संबंध हमेशा नहीं दिखता. इसलिए इसका असर महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे तुरंत और बहुत बड़ा बाजार लाभ मानना उचित नहीं होगा.