Asha Bhosle Birthday: 'झाड़ू और मछली...' जब आशा भोसले के पति ने जन्मदिन पर दिया ये अनोखा गिफ्ट, वजह जानकर आप भी मुस्कुरा देंगे
आशा भोसले की जिंदगी में संगीत जितना खास था, उतनी ही दिलचस्प उनकी निजी जिंदगी भी रही. आर.डी. बर्मन के साथ उनका रिश्ता प्यार, दोस्ती और मजाकिया अंदाज से भरा था.
नई दिल्ली: आशा भोसले की जिंदगी में संगीत जितना खास था, उतनी ही दिलचस्प उनकी निजी जिंदगी भी रही. आर.डी. बर्मन के साथ उनका रिश्ता प्यार, दोस्ती और मजाकिया अंदाज से भरा था. एक पुराने इंटरव्यू में आशा भोसले ने बताया था कि जन्मदिन पर पंचम दा ने उन्हें झाड़ू और मछली तक गिफ्ट की थी. सुनने में यह तोहफा अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे दोनों की खास बॉन्डिंग और पंचम दा का मजाकिया अंदाज छिपा था.
आवाज जिसने कई पीढ़ियों को अपना दीवाना बनाया
आशा भोसले ने अपनी आवाज से हिंदी सिनेमा के संगीत को एक अलग रंग दिया. उनके गीतों में कभी प्यार और दर्द सुनाई दिया तो कभी शरारत और मस्ती. 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली रियासत के गोआर इलाके में जन्मी आशा का बचपन संगीत के माहौल में बीता. पिता के निधन के बाद परिवार पर मुश्किलें आईं और उन्हें छोटी उम्र में ही काम करना पड़ा. फिल्मों के लिए गाना उनके लिए परिवार संभालने का जरिया भी बना.
शुरुआत में आसान नहीं था अपनी जगह बनाना
संगीत की दुनिया में शुरुआती दौर आशा भोसले के लिए आसान नहीं रहा. उस समय कई बड़ी गायिकाओं का दबदबा था और लता मंगेशकर भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी थीं. आशा को कई बार छोटे बजट की फिल्मों में गाने का मौका मिला. उन्होंने इसके बावजूद पीछे हटने के बजाय लगातार काम किया. उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने खुद को किसी एक शैली तक सीमित नहीं रखा. कैबरे, पॉप, लोकगीत, गजल, भजन और फिल्मी गीतों में उनकी आवाज सुनाई दी.
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निजी जिंदगी में भी आए कई उतार चढ़ाव
आशा भोसले की निजी जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही. कम उम्र में उनकी शादी गणपतराव भोसले से हुई, जिससे उनके तीन बच्चे हुए. हालांकि बाद में यह रिश्ता टूट गया. इसके बाद बच्चों की जिम्मेदारी के साथ उन्होंने अपने संगीत के सफर को भी जारी रखा. मुश्किल दौर में संगीत उनके साथ बना रहा. इसी दौरान आगे चलकर उनकी जिंदगी में संगीतकार राहुल देव बर्मन यानी पंचम दा की एंट्री हुई और दोनों का रिश्ता बेहद खास बन गया.
पहली मुलाकात में ही पंचम दा ने मांगा था ऑटोग्राफ
आशा भोसले ने एक पुराने इंटरव्यू में पंचम दा से अपनी पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया था. उन्होंने बताया था कि उस समय पंचम दा काफी युवा, दुबले पतले और मोटा चश्मा पहनते थे. उन्होंने आशा से उनका ऑटोग्राफ मांगा था. वह रेडियो पर आशा का मराठी नाट्य संगीत सुन चुके थे. शुरुआत में दोनों के बीच दोस्ती हुई. एक समय पढ़ाई को लेकर हुई बातचीत के दौरान पंचम दा उनसे नाराज भी हो गए थे, लेकिन समय के साथ रिश्ता गहरा होता गया.
संगीत के बीच पनपा प्यार, फिर बनी जीवनसाथी की जोड़ी
पंचम दा के लिए संगीत उनकी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा था. आशा ने बताया था कि वह संगीत में इस कदर डूबे रहते थे कि अपनी दूसरी जरूरतों तक को नजरअंदाज कर देते थे. धीरे धीरे आशा उनके इस स्वभाव को समझने लगीं. दोनों ने 1980 में शादी कर ली. इसके बाद उनकी जोड़ी ने संगीत की दुनिया में भी कई यादगार गीत दिए. 'पिया तू अब तो आजा', 'दम मारो दम', 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' और 'चुरा लिया है तुमने' जैसे गीत इस जोड़ी की पहचान बने.
झाड़ू और मछली का वो जन्मदिन वाला तोहफा
पंचम दा से जुड़ा सबसे मजेदार किस्सा उनके एक जन्मदिन के तोहफे का है. आशा भोसले ने पुराने इंटरव्यू में बताया था कि पंचम दा ने उन्हें झाड़ू और मछली गिफ्ट की थी. इसके पीछे उनका मजाकिया अंदाज था. आशा खाना बनाने के साथ घर की सफाई को लेकर भी सजग रहती थीं, इसलिए पंचम दा ने उनकी इन्हीं आदतों को मजाक का हिस्सा बना दिया. यह अतरंगी तोहफा दोनों के रिश्ते में मौजूद अपनापन और दोस्ताना अंदाज को दिखाता है.