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'सब सनातनी हैं, सत्य लिखने में क्या घबराना', सारा अली खान के हलफनामा विवाद में कूदीं कंगना रनौत

सारा अली खान से केदारनाथ दर्शन के लिए हलफनामा मांगे जाने के विवाद पर कंगना रनौत ने अपना रिएक्शन दिया है. उन्होंने कहा कि अगर कोई सनातन में विश्वास रखता है तो इसे लिखने में डर कैसा.

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Babli Rautela

मुंबई: केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर में दर्शन के लिए हलफनामा देने के नियम को लेकर चल रही बहस अब और तेज हो गई है. इस पूरे मामले में अब बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने अपना रिएक्शन साझा किया है, जिसने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब खबरें सामने आईं कि मंदिर प्रशासन गैर सनातन श्रद्धालुओं से उनकी आस्था का लिखित प्रमाण मांग सकता है. इस चर्चा के केंद्र में सारा अली खान का नाम भी आ गया.

संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर सीधा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई सनातन धर्म में विश्वास रखता है तो उसे इसे लिखित रूप में बताने में कोई डर नहीं होना चाहिए. उनके शब्दों में यह संदेश साफ था कि आस्था को खुलकर स्वीकार करने में हिचक नहीं होनी चाहिए.

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह मामला तब सामने आया जब बद्री केदार मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने नया नियम लागू करने की बात कही. उनके अनुसार, जो लोग सनातन धर्म से नहीं हैं लेकिन मंदिर में दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें एक हलफनामा देना होगा. इसमें उन्हें यह लिखित रूप से स्वीकार करना होगा कि उनकी सनातन धर्म में आस्था है.

सारा अली खान कई सालों से केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के लिए जाती रही हैं. उन्होंने अपनी फिल्म केदारनाथ से बॉलीवुड में कदम रखा था और तब से उनका इस मंदिर से खास जुड़ाव रहा है. इसी वजह से जब यह नियम सामने आया तो उनका नाम सबसे पहले चर्चा में आया.

विवादों में क्यों आईं सारा अली खान

सारा ने पहले कई इंटरव्यू में कहा है कि केदारनाथ उनके लिए एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है. उनके अनुसार वहां जाने से उन्हें सुकून और शांति मिलती है. हालांकि इस नए विवाद पर सारा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मंदिर समिति का कहना है कि यह नियम धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं को बनाए रखने के लिए लाया गया है. समिति ने हलफनामे के लिए एक तय प्रारूप भी तैयार किया है और इस प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा गया है.

देश के कई मंदिरों में पहले से ही प्रवेश को लेकर कुछ नियम लागू हैं. पुरी के जगन्नाथ मंदिर में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति है. वहीं तिरुपति मंदिर में भी कुछ मामलों में श्रद्धालुओं से आस्था का प्रमाण मांगा जाता है.