'धुरंधर ऑस्कर के लायक ही नहीं थी!' जूरी मेंबर ने उड़ाई धज्जियां, बताया कौन सी फिल्म थी असली दावेदार
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की 14 सदस्यीय जूरी ने 32 फिल्मों में से गोंधल को चुना. विवेक वासवानी ने मीडिया संग बातचीत में बताया कि जूरी को साफ निर्देश थे. फिल्म ऐसी होनी चाहिए जो भारतीय संस्कृति और परंपरा को दिखाए, लेकिन साथ ही वैश्विक स्तर पर आकर्षक लगे. गोंधल ठीक वैसी ही फिल्म है.
भारत की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक एंट्री के रूप में मराठी फिल्म गोंधल का चयन हो गया है. इस फैसले के पीछे की वजह अब जूरी मेंबर विवेक वासवानी ने खुद बता दी है. उन्होंने साफ कहा कि आदित्य धर की सुपरहिट फिल्म धुरंधर ऑस्कर मैटेरियल नहीं थी.
'धुरंधर ऑस्कर के लायक ही नहीं थी!'
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की 14 सदस्यीय जूरी ने 32 फिल्मों में से गोंधल को चुना. विवेक वासवानी ने मीडिया संग बातचीत में बताया कि जूरी को साफ निर्देश थे. फिल्म ऐसी होनी चाहिए जो भारतीय संस्कृति और परंपरा को दिखाए, लेकिन साथ ही वैश्विक स्तर पर आकर्षक लगे. गोंधल ठीक वैसी ही फिल्म है.
मराठी फिल्म गोंधल का का हुआ चयन
यह फिल्म महाराष्ट्र के एक दूरदराज के गांव में एक रात की कहानी है. गोंधल नामक पारंपरिक लोक अनुष्ठान चल रहा है, जिसमें संगीत, नृत्य और पौराणिक कथाएं होती हैं. इसी बैकग्राउंड में हत्या और साजिश की कहानी बुनी गई है. पूरा सस्पेंस गाने-बजाने और नाचने के बीच चलता है. विवेक वासवानी के अनुसार यही मिश्रण फिल्म को खास बनाता है. इलैयाराजा का म्यूजिक तो जैसे चीरी पर चाशनी हो गई.
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बताया कौन सी फिल्म थी असली दावेदार
जूरी के अंतिम तीन दावेदार थे- गोंधल, नागा फिल्म आंग और इम्तियाज अली की मैं वापस आऊंगा. इम्तियाज की फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी पर आधारित थी. जूरी को लगा कि यह विषय अमेरिका के दर्शकों से जुड़ नहीं पाएगा, इसलिए इसे वोट नहीं मिले.
धुरंधर की बात करें तो रणवीर सिंह की यह फिल्म पिछले साल की सबसे सफल हिंदी फिल्मों में शामिल रही. फिर भी इसे सिर्फ चार वोट मिले. विवेक वासवानी ने सीधे कहा- 'कुछ लोगों को फिल्म अच्छी लगी, लेकिन हमने इसे ऑस्कर के लायक नहीं माना.'
गोंधल को चुनने का मुख्य कारण इसकी अनोखी स्टाइल है. यह न सिर्फ भारतीय लोक संस्कृति को जीवंत तरीके से पेश करती है, बल्कि थ्रिलर का मजा भी देती है. ऑस्कर में भारत की एंट्री के लिए ऐसी फिल्म चाहिए जो अलग दिखे और संस्कृति को ग्लोबल अपील के साथ पेश करें. जूरी का मानना है कि गोंधल यही काम करती है.
अब देखना होगा कि यह मराठी फिल्म अंतरराष्ट्रीय मंच पर कितना असर छोड़ती है. भारतीय सिनेमा के लिए यह एक दिलचस्प मौका है.