New Year 2026

'अंग्रेजों के जमाने के जेलर...', सिर्फ कॉमिक टाइमिंग ही नहीं संगीत से भी करते थे दिलों पर राज

असरानी हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में हैं जिन्होंने पांच दशकों तक दर्शकों को खूब हंसाया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि कॉमेडी के साथ साथ वह अच्छे सिंगर भी हैं. अपने जन्मदिन पर उनका फिल्मी और निजी सफर खास बन जाता है.

Social Media
Babli Rautela

मुंबई: हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर और कॉमेडियन असरानी आज अपना 82वां जन्मदिन मना रहे हैं. 1 जनवरी 1940 को जयपुर में जन्मे असरानी का असली नाम गोवर्धन असरानी है. फिल्मों में उनका नाम आते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. उन्होंने करीब पांच दशक तक सिनेमा की सेवा की और 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया.

असरानी का फिल्मी सफर आसान नहीं रहा. साल 1964 में उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिला लिया. वहीं से उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं. शुरुआत में उन्हें फिल्मों में ज्यादा मौके नहीं मिले. हालात ऐसे थे कि उन्हें एफटीआईआई में ही शिक्षक बनकर पढ़ाना पड़ा. लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं छोड़ा और खुद पर भरोसा बनाए रखा.

कॉमिक टाइमिंग से खींचा था लोगों का ध्यान

साल 1967 में रिलीज हुई फिल्म कांच की चूड़ियां से असरानी ने फिल्मों में कदम रखा. धीरे धीरे उन्हें छोटे रोल मिलने लगे. इन भूमिकाओं में उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से सबका ध्यान खींचा. उनकी सहज अदायगी और मासूम चेहरे ने दर्शकों को उनसे जोड़ दिया.

बॉलीवुड में कई कलाकार आए और चले गए लेकिन असरानी उन चुनिंदा नामों में हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता. उनकी मौजूदगी मात्र से सीन में जान आ जाती थी. उन्होंने यह साबित किया कि साइड रोल भी यादगार हो सकते हैं. उनकी शानदार परफॉर्मेंस के लिए उन्हें बेस्ट परफॉर्मेंस कॉमिक रोल का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

शोले का जेलर बना अमर

असरानी ने भले ही ज्यादातर फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं लेकिन शोले में जेलर का किरदार उन्हें अमर बना गया. हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं वाला डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर है. इस एक किरदार ने उन्हें हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह दिला दी.

बता दें कि असरानी ने लीड एक्टर के तौर पर भी काम किया है. चला मुरारी हीरो बनने और सलाम मेमसाहब जैसी फिल्मों में वह अहम किरदार में नजर आए. हर रोल में उन्होंने यह साबित किया कि वह सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं हैं.

असरानी का संगीत से भी गहरा नाता

असरानी सिर्फ हंसाते ही नहीं बल्कि अच्छा गाते भी हैं. यह बात बहुत कम लोग जानते हैं. साल 1977 में आई फिल्म आलाप में उन्होंने दो गाने गाए जो उन्हीं पर फिल्माए गए. इसके अलावा फूल खिले हैं गुलशन गुलशन में उन्होंने मशहूर गायक किशोर कुमार के साथ भी गाना गाया. यह उनके छुपे हुए टैलेंट को दिखाता है.