UGC को नियम बनाने की ताकत कहां से मिलती है, नए इक्विटी रूल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बीच समझिए पूरा कानूनी आधार
UGC के नए इक्विटी रूल को लेकर देशभर में बहस जारी है और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फिलहाल रोक लगा दी है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को उच्च शिक्षा से जुड़े नियम और रेगुलेशन बनाने की शक्तियां कहां से मिलती हैं.
नई दिल्ली: देश के उच्च शिक्षा तंत्र को नियंत्रित करने वाली संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC इन दिनों चर्चा के केंद्र में है. इसके नए इक्विटी रूल को लेकर उठे विवाद ने आयोग की संवैधानिक शक्तियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस रेगुलेशन पर रोक लगाए जाने के बाद यह जानना जरूरी हो गया है कि UGC को नियम और अधिनियम बनाने का अधिकार आखिर किस कानून से प्राप्त होता है.
UGC की स्थापना का कानूनी आधार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट 1956 के तहत किया गया था. इस अधिनियम का उद्देश्य देशभर के विश्वविद्यालयों में शिक्षा के मानकों को तय करना और उनमें समन्वय स्थापित करना है. संसद द्वारा बनाए गए इस कानून ने UGC को उच्च शिक्षा संस्थानों के संचालन और गुणवत्ता से जुड़े मामलों में एक केंद्रीय भूमिका दी.
केंद्र सरकार और आयोग की भूमिका
UGC एक्ट 1956 की धारा 25 के तहत केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति दी गई है. इसी धारा के उपखंडों के अनुसार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति, उनकी सेवा शर्तें और सेवानिवृत्ति से जुड़े प्रावधान तय किए जाते हैं. यह प्रावधान मुख्य रूप से आयोग की संरचना को निर्धारित करता है.
UGC को रेगुलेशन बनाने की शक्ति
असल अधिकार UGC एक्ट 1956 की धारा 26 से मिलता है, जिसके तहत आयोग रेगुलेशन बना सकता है. वहीं धारा 12 में आयोग की शक्तियों और कार्यों को स्पष्ट किया गया है. इन दोनों धाराओं के तहत UGC विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए अकादमिक, प्रशासनिक और समानता से जुड़े नियम लागू करता है.
इक्विटी रूल और कानूनी विवाद
UGC का नया इक्विटी रूल भी इन्हीं धाराओं के तहत बनाया गया था. इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशी माहौल को बढ़ावा देना बताया गया. 13 जनवरी से लागू होते ही इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल उठने लगे और इसे असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई.
सुप्रीम कोर्ट का रुख
याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस रेगुलेशन पर स्टे लगा दिया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि UGC की शक्तियां कानून से आती हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल संवैधानिक दायरे में ही होना चाहिए. आने वाले समय में इस पर अंतिम फैसला उच्च शिक्षा नीति की दिशा तय करेगा.
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