नई दिल्ली: पिछले कुछ वर्षों में आयरलैंड भारतीय छात्रों के बीच पढ़ाई के लिए तेजी से लोकप्रिय हुआ है. ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सख्त इमिग्रेशन नियमों के बाद बड़ी संख्या में छात्र आयरलैंड की यूनिवर्सिटीज का रुख कर रहे हैं.
लेकिन अब आयरलैंड से जुड़ी एक सच्चाई सामने आई है, जिसने छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. पढ़ाई के बाद नौकरी न मिलने से आर्थिक संकट गहराता जा रहा है.
आयरलैंड में मास्टर्स करने वाले भारतीय छात्र ने बताया कि डिग्री हासिल करने के बाद भी टेक्निकल सेक्टर में नौकरी मिलना बेहद कठिन है. उसके अनुसार, कंप्यूटर साइंस जैसे लोकप्रिय कोर्स के बावजूद अधिकांश ग्रेजुएट्स को सुपरमार्केट, रेस्तरां और बार में काम करना पड़ रहा है. इससे करियर ग्रोथ और आर्थिक स्थिरता दोनों पर असर पड़ रहा है.
पोस्ट करने वाले भारतीय के पास पढ़ाई से पहले लंदन और दुबई में पांच साल का वर्क एक्सपीरियंस था. इसी अनुभव के कारण उसे किसी तरह नौकरी मिल सकी. उसने बताया कि फ्रेश ग्रेजुएट्स के लिए स्थिति और भी खराब है. कंपनियां अनुभव के बिना गैर-यूरोपीय संघ के छात्रों को नौकरी देने से बच रही हैं.
भारतीय वर्कर ने यह भी बताया कि आयरलैंड में वीजा स्पांसरशिप हासिल करना आसान नहीं है. सरकार ने न्यूनतम सैलरी लिमिट बढ़ा दी है, जिससे कंपनियां विदेशी छात्रों को हायर करने में रुचि नहीं दिखा रही हैं. इसका सीधा असर भारतीय छात्रों के करियर और भविष्य की योजनाओं पर पड़ रहा है.
कई छात्रों को वीजा अवधि खत्म होने के बाद भारत लौटना पड़ा है. इनमें से बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है, जो एजुकेशन लोन चुकाने में असमर्थ हैं. पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद नौकरी न मिलना उनके लिए दोहरी मार साबित हो रहा है.
भारतीय ने साफ कहा है कि एजुकेशन लोन लेकर आयरलैंड आना बड़ा जोखिम हो सकता है. उसका मानना है कि इससे न केवल छात्र बल्कि उनके माता-पिता की आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है. उसने छात्रों को सलाह दी है कि विदेश जाने से पहले जमीनी हकीकत को समझना बेहद जरूरी है.