नई दिल्ली: बच्चे का पहला स्कूल केवल एक एडमिशन नहीं होता, बल्कि यह उसके सामाजिक और भावनात्मक विकास की शुरुआत होती है. इस दिन को लेकर जितनी उत्सुकता माता-पिता में होती है, उतनी ही उलझन बच्चे के मन में भी रहती है.
नई जगह, अनजान टीचर और दोस्तों के बीच खुद को ढालना बच्चे के लिए आसान नहीं होता. ऐसे में सही मार्गदर्शन और समझदारी बहुत जरूरी होती है.
स्कूल जाने से पहले बच्चे से स्कूल के बारे में सकारात्मक बातचीत करें. उसे डराने या दबाव डालने की बजाय सरल शब्दों में समझाएं कि स्कूल एक सुरक्षित और मजेदार जगह है. कहानियों और उदाहरणों से स्कूल की दिनचर्या बताएं, ताकि बच्चा पहले से तैयार महसूस करे और अनजाने डर से बचे.
स्कूल शुरू होने से कुछ दिन पहले ही सोने और उठने का समय तय कर दें. समय पर खाना, कपड़े बदलना और बैग तैयार करना सिखाएं. इससे स्कूल के पहले दिन अचानक बदलाव नहीं लगेगा और बच्चा खुद को ज्यादा सहज महसूस करेगा. नियमित दिनचर्या बच्चे में अनुशासन भी विकसित करती है.
पहले दिन बच्चे को स्कूल छोड़ते समय जल्दबाजी या घबराहट न दिखाएं. शांत और मुस्कुराते हुए विदा करें. बार-बार यह भरोसा दिलाएं कि आप स्कूल के बाद उसे लेने जरूर आएंगे. माता-पिता का आत्मविश्वास बच्चे की चिंता को कम करने में बड़ी भूमिका निभाता है.
बच्चे को पहले से बताएं कि टीचर उसकी मदद के लिए हैं और किसी परेशानी में उनसे बात की जा सकती है. स्कूल का नाम, क्लास और टीचर का नाम बार-बार दोहराएं. इससे बच्चे को अपने आसपास की चीजों को पहचानने में आसानी होती है.
बच्चे को खुद से पानी पीना, टॉयलेट बताना और अपनी चीजें पहचानना सिखाएं. यह आदतें स्कूल में उसे आत्मनिर्भर बनाती हैं. जब बच्चा खुद को सक्षम महसूस करता है, तो उसका डर अपने आप कम हो जाता है और स्कूल का अनुभव बेहतर बनता है. यहां आप इस बात का भी ध्यान रखें कि पहले ही दिन से बच्चे पर दबाव ना बनाएं.