नई दिल्ली: कनाडा इंजीनियरिंग के शौकीन भारतीय युवाओं के बीच लंबे समय से पसंदीदा देश रहा है. अंग्रेजी भाषा, भारतीय समुदाय की मजबूत मौजूदगी और बेहतर करियर प्रॉस्पेक्ट्स की वजह से यहां हर साल हजारों छात्र इंजीनियरिंग पढ़ने पहुंचते हैं. जो छात्र अच्छी यूनिवर्सिटी की तलाश में उनके लिए यह काम की खबर है.
अब क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 की ताजा रिपोर्ट ने इन छात्रों के लिए और भी मजबूत आधार मुहैया कराया है. इसमें कनाडा की कई यूनिवर्सिटीज को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विश्व स्तरीय माना गया है.
QS रैंकिंग 2026 में यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो इंजीनियरिंग में विश्व के टॉप 20 में शामिल है. इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया और यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू का नंबर आता है. ये संस्थान न सिर्फ अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जानी जाती हैं बल्कि रिसर्च और इंडस्ट्री कनेक्शन के मामले में भी आगे हैं. भारतीय छात्र इनमें एडमिशन लेकर विश्व स्तरीय शिक्षा हासिल कर सकते हैं.
मैक्गिल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा भी QS इंजीनियरिंग रैंकिंग में अच्छी स्थिति में हैं. ये यूनिवर्सिटीज प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स पर खास ध्यान देती हैं. यहां पढ़ने वाले छात्रों को आधुनिक लैब्स और ग्लोबल फैकल्टी का फायदा मिलता है, जो करियर की नींव मजबूत करता है.
मॉन्ट्रियाल यूनिवर्सिटी, क्वीन यूनिवर्सिटी किंग्सटन, कैलगरी यूनिवर्सिटी, मैक्मास्टर यूनिवर्सिटी और वेस्टर्न यूनिवर्सिटी भी कनाडा की टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में शुमार हैं. ये यूनिवर्सिटीज अलग-अलग स्पेशलाइजेशन जैसे सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बेहतरीन प्रोग्राम ऑफर करती हैं.
कनाडा में इंजीनियरिंग डिग्री पूरी करने के बाद छात्रों को पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट मिलता है. इस परमिट के जरिए तीन साल तक फुल टाइम काम किया जा सकता है. कई छात्र इस दौरान अनुभव हासिल कर परमानेंट रेजिडेंसी की राह भी आसान बना लेते हैं.
यहां की पढ़ाई गुणवत्ता भरी है और खर्च भी दूसरे पश्चिमी देशों से अपेक्षाकृत कम है. भारतीय छात्रों को यहां सांस्कृतिक तालमेल आसानी से बैठ जाता है. QS रैंकिंग 2026 ने इन यूनिवर्सिटीज को हाईलाइट करके छात्रों के फैसले को और आसान बना दिया है.