आजकल SIP को हर कोई आसान और सुरक्षित निवेश का जरिया मान रहा है. हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाकर बड़ा फंड बनाने का सपना हर किसी को आकर्षित करता है. लेकिन सच्चाई यह है कि SIP में भी पैसा फंस सकता है, अगर आप इसे बिना समझे शुरू कर दें. समस्या SIP में नहीं, बल्कि गलत तरीके से निवेश करने में है. बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान गलत फैसले लेने से काफी नुकसान हो सकता है. इसलिए SIP शुरू करने से पहले कुछ जरूरी सवाल खुद से जरूर पूछ लेना चाहिए.
बहुत से लोग समझते हैं कि SIP में पैसा लॉक हो जाता है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है. SIP ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड में होता है, इसलिए आप कभी भी पैसा निकाल सकते हैं. फिर भी नुकसान हो सकता है अगर आप गलत फंड चुनें, बहुत कम समय के लिए निवेश करें या बाजार गिरने पर घबरा जाएं. असल में SIP का फायदा लंबी अवधि और अनुशासन से ही मिलता है.
SIP का मतलब सिर्फ हर महीने पैसा लगाना नहीं है, सबसे महत्वपूर्ण है सही फंड का चुनाव. फंड का प्रकार, उसका रिस्क लेवल, पिछले कई सालों का ट्रैक रिकॉर्ड और कंसिस्टेंसी देखना बहुत जरूरी है. सिर्फ पिछले साल के हाई रिटर्न देखकर फंड चुनना बड़ी गलती है. गलत फंड चुनने से लंबे समय में भी अच्छा रिटर्न नहीं मिल पाता.
SIP का असली फायदा तभी मिलता है जब आपका निवेश का समय लंबा हो. इक्विटी SIP के लिए कम से कम 5 से 7 साल या उससे ज्यादा का समय ideal माना जाता है. अगर आप 1-2 साल में पैसा निकालने की सोच रहे हैं तो बाजार गिरने पर नुकसान होने की संभावना ज्यादा रहती है. कम समय के लिए SIP शुरू करना सबसे बड़ी गलती है.
SIP की सबसे बड़ी परीक्षा तब होती है जब बाजार तेजी से गिरता है. कई निवेशक NAV घटने पर घबरा जाते हैं और SIP रोक देते हैं या पूरा पैसा निकाल लेते हैं. यही गलती सबसे ज्यादा नुकसान कराती है. गिरते बाजार में भी SIP जारी रखने वालों को लंबे समय में अच्छा फायदा मिलता है.