7 लाख की कार हो गई कबाड़, 7 लाख के सोने ने दिया 240% रिटर्न, आखिर कैसे? जान लें स्मार्ट निवेश का फंडा
एक ही समय में खरीदी गई ₹7 लाख की कार और सोना, लेकिन 13 साल बाद दोनों के नतीजे हैरान कर देने वाले हैं. कार आज कबाड़ के भाव रह गई, जबकि सोने ने करोड़ों का फायदा करा दिया. यही फर्क है ‘डिप्रिसिएशन’ और ‘एप्रिसिएशन’ का.
मिडिल क्लास परिवारों में कार खरीदना हमेशा तरक्की का प्रतीक माना जाता है, जबकि सोना खरीदना कई बार पुरानी सोच या "आउटडेटेड आदत" समझा जाता है. लेकिन वक्त ही असली तस्वीर दिखाता है, जहाँ कार की चमक चंद साल में फीकी पड़ जाती है, वहीं सोना खामोशी से संपत्ति बढ़ाने का काम करता है.
अगर हम 2012 की बात करें, तो मान लीजिए एक पिता ने ₹7 लाख की नई कार खरीदी और उसी समय माँ ने उतनी ही रकम का सोना. उस वक्त दोनों ही फैसले सही लगे. कार से तुरंत खुशी मिली और सोना बस एक निवेश जैसा लगा. लेकिन 2025 तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई. कार जिसकी कीमत 7 लाख थी, आज सिर्फ ₹1.2–1.5 लाख रह गई. वहीं, सोना जिसने तब शायद ज्यादा ध्यान आकर्षित नहीं किया, अब लगभग ₹23–25 लाख का हो गया है.
डिप्रिसिएशन VS एप्रिसिएशन
अगर सीधी गणना करें तो कार ने 13 साल में लगभग 80% अपनी कीमत खो दी. जबकि सोने ने उसी समय में करीब 240% की बढ़ोतरी की. कार शो-रूम से बाहर निकलते ही वैल्यू गिराना शुरू कर देती है. उसकी सर्विस, ईंधन और रिपेयरिंग पर खर्च अलग. वहीं सोना बिना किसी मेंटेनेंस के समय के साथ लगातार बढ़ता गया. यही वजह है कि कार और मोबाइल जैसे गैजेट्स भावनात्मक संतोष तो देते हैं, लेकिन असली संपत्ति नहीं बनाते.
सोना क्यों है भरोसेमंद निवेश?
सोना सिर्फ चमकने वाली धातु नहीं, बल्कि ‘इंफ्लेशन हेज’ भी है. यानी महंगाई और रुपए की गिरती कीमत के बीच भी यह अपनी और आपकी ताकत बनाए रखता है. अगस्त 2025 में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,01,240 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट ₹92,800 प्रति 10 ग्राम है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी सोना $3,300 प्रति औंस के पार है. 2024 में सोने ने 20% से ज्यादा रिटर्न दिया और यह साबित कर दिया कि बाजार की अनिश्चितता और महँगाई के बीच भी यह सुरक्षित व मजबूत निवेश है.
असली निवेश कहाँ है?
कार, मोबाइल और छुट्टियाँ जीवन को खुशगवार जरूर बनाती हैं, लेकिन यह संपत्ति नहीं हैं. सोना, चाहे कितना भी पुराना निवेश क्यों न लगे, समय के साथ संपत्ति बनाने की ताकत रखता है. यही कारण है कि 2012 में पिता की कार और मां के सोने में से विजेता कौन है? जवाब साफ है- "माँ का सोना." कभी-कभी सबसे समझदार निवेश सबसे साधारण होते हैं, और ‘गोल्डन’ निवेश होते हैं.
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