बाजार में रिकॉर्ड तेजी, फिर भी IT शेयरों में गिरावट! किस डर से निवेशकों ने क्यों बनाई दूरी?
आईटी शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' यानी AI का तेजी से बढ़ना है. कोडिंग टूल्स के आने से पारंपरिक सॉफ्टवेयर काम कम होने की आशंका है जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स अपने साल के निचले स्तर पर आ गया है.
मुंबई: शुक्रवार को जहां भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा रौनक थी और सेंसेक्स-निफ्टी नए रिकॉर्ड बना रहे थे वहीं IT सेक्टर के शेयरों में उदासी छाई रही. पूरे बाजार की इस भारी तेजी के बावजूद आईटी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे और उनमें गिरावट का सिलसिला जारी रहा.
बड़े शेयर भी लाल निशान पर
बाजार के इस सत्र के दौरान देश की कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. टेक महिंद्रा, कोफॉरगे, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एम्फैसिस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे. इस गिरावट के चलते 'निफ्टी आईटी इंडेक्स' उस दिन बाजार के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स में से एक रहा.
आईटी शेयरों में आई इस गिरावट की सबसे मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से पैर पसारना है. निवेशकों के मन में यह डर बैठ गया है कि एआई के एडवांस टूल्स आने वाले समय में पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के काम को काफी हद तक कम कर सकते हैं. भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी तरह के पारंपरिक कामकाज से आता है.
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जानकरों ने क्या कहा?
बाजार के जानकारों का मानना है कि ग्लोबल टेक कंपनियों द्वारा हाल ही में पेश किए गए एआई मॉडल्स कोडिंग करने में बेहद माहिर हो चुके हैं. ये टूल्स इंसानों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी और कुशलता से कोड लिख सकते हैं उसकी समीक्षा कर सकते हैं और उसे सुधार भी सकते हैं. ऐसे में आशंका है कि कंपनियों को अब कोडिंग जैसे कामों के लिए कम डेवलपर्स की जरूरत पड़ेगी जिससे आईटी सर्विस प्रदाताओं का बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकता है.
विश्लेषकों के मुताबिक एआई के कारण उत्पादकता तो बढ़ेगी लेकिन इससे प्रोजेक्ट्स की लागत कम हो जाएगी और कर्मचारियों की मांग घटेगी. इसका सीधा असर नए कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमतों पर पड़ेगा और कंपनियों को अपनी फीस कम करनी पड़ सकती है. इसी भविष्य के खतरे को भांपते हुए निवेशक इस सेक्टर में पैसा लगाने से कतरा रहे हैं.
किन कंपनियों को झेलनी पड़ेगी मार
रिपोर्ट्स के अनुसार जो कंपनियां केवल एप्लीकेशन डेवलपमेंट के भरोसे हैं उन पर एआई की मार सबसे ज्यादा पड़ सकती है. इसके विपरीत साइबर सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों पर इसका असर कम होने की उम्मीद है. वैसे आईटी सेक्टर पिछले कुछ हफ्तों से लगातार मंदी झेल रहा है और निफ्टी आईटी इंडेक्स जून की शुरुआत से अब तक गिरकर अपने साल के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है.