अमेरिका में महंगाई ने तोड़ी कमर! पेट्रोल से लेकर खाने तक सब कुछ हुआ महंगा, क्या आने वाला है बड़ा संकट?

अमेरिका में महंगाई ने चार साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. पेट्रोल और जरूरी सामान की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम लोगों पर भारी बोझ पड़ा है और आर्थिक संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है.

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Babli Rautela

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका इस समय महंगाई के गंभीर संकट से जूझ रही है. ताजा आंकड़ों ने न केवल आम लोगों को परेशान किया है बल्कि अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं की चिंता भी बढ़ा दी है. अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी मार्च के आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 3.3% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह पिछले महीने के 2.4% के मुकाबले काफी ज्यादा है.

महीने दर महीने के आधार पर भी कीमतों में 0.9% की वृद्धि हुई है जो पिछले कुछ वर्षों में सबसे तेज मानी जा रही है. यह संकेत है कि महंगाई तेजी से कंट्रोल से बाहर होती जा रही है.

ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट का असर

इस बढ़ती महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक ऊर्जा संकट को माना जा रहा है. खासकर ईरान के साथ चल रहे तनाव ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है. इसका सीधा असर अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों पर पड़ा है. मार्च में गैस की कीमतों में पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई. औसत कीमत 4.17 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है. ऊर्जा की कीमतों में तेजी का असर केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं है. यह पूरे सप्लाई सिस्टम को प्रभावित कर रही है जिससे हर चीज महंगी होती जा रही है.

आम आदमी पर बढ़ता बोझ

महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. भले ही विशेषज्ञ कोर महंगाई की बात करते हों लेकिन आम नागरिक के लिए खाने पीने की चीजें और ईंधन ही सबसे अहम होते हैं. जब डीजल और पेट्रोल महंगे होते हैं तो माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है. इसका असर सीधे तौर पर खाने पीने के सामान, किराना, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं पर पड़ता है. कई बड़ी कंपनियां जैसे Amazon और UPS पहले ही फ्यूल सरचार्ज लागू कर चुकी हैं. इसका मतलब है कि आने वाले समय में ऑनलाइन सामान मंगाना भी महंगा हो सकता है.

ब्याज दरों पर बड़ा असर

महंगाई के इस झटके ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक US Federal Reserve की नीतियों को भी प्रभावित किया है. पहले उम्मीद थी कि इस साल ब्याज दरों में कटौती हो सकती है, लेकिन अब यह संभावना लगभग खत्म होती नजर आ रही है. निवेशकों का मानना है कि आने वाले लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं. अगर महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी भी की जा सकती है. इसका असर सीधे तौर पर लोन लेने वालों पर पड़ेगा. घर, कार और बिजनेस के लिए कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा.