ट्रंप की 500% टैरिफ की धमकी से हिला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 750 अंक लुढ़का
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 500% टैरिफ धमकी से भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह हिल गया. सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज हुई, जबकि तेल, मेटल और निवेशक भावनाओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ा.
नई दिल्ली: साल की शुरुआत में ही भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक राजनीति का दबाव साफ दिखने लगा है. रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की नई रणनीति ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की धमकी ने बाजार की स्थिरता बिगाड़ दी. इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ता दिख रहा है, जो रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं.
ट्रंप की टैरिफ धमकी से क्यों मचा हड़कंप
अमेरिका में पेश किए गए 'Sanctioning Russia Act of 2025' को ट्रंप की सख्त रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. इस प्रस्ताव के तहत रूस से तेल, गैस या ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी आयात शुल्क लगाया जा सकता है. 500% तक टैरिफ की आशंका ने वैश्विक व्यापार संतुलन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश इस दायरे में आते हैं, जिससे निवेशकों की घबराहट बढ़ गई.
शेयर बाजार में चौथे दिन भी भारी गिरावट
गुरुवार को भारतीय बाजार ने कमजोर शुरुआत की और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली तेज होती चली गई. सेंसेक्स दोपहर तक करीब 750 अंक टूटकर 84,200 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी 260 अंकों से ज्यादा गिरकर 25,900 के नीचे फिसल गया. यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब बाजार लाल निशान में बंद होने की ओर बढ़ा. निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाता नजर आया.
तेल और मेटल शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
इस गिरावट में सबसे ज्यादा चोट तेल और मेटल सेक्टर को लगी. हिंडाल्को के शेयरों में लगभग 4% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि ONGC और जियो फाइनेंशियल जैसे बड़े शेयर भी 3% तक टूटे. रूस से कच्चे तेल पर निर्भरता के चलते निवेशकों को आशंका है कि अगर अमेरिका सख्त कदम उठाता है, तो इन कंपनियों की लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
भारतीय बाजार पर दबाव केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक संकेतों से भी आया. जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग भारी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे. अमेरिकी शेयर बाजार भी पिछली रात कमजोरी के साथ बंद हुए थे. इन संकेतों ने यह साफ कर दिया कि वैश्विक निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आगे की उम्मीद
एक बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही. जनवरी की शुरुआत में ही एफपीआई हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं. इससे बाजार की धारणा कमजोर हुई है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं, लेकिन फिलहाल अस्थिरता बनी रहने की संभावना है.