जोहो कॉर्पोरेशन के सीईओ श्रीधर वेम्बू ने हाल ही में भारत के विकास मॉडल पर अपनी विचारधारा साझा की और देश के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती दी. उन्होंने भारतीयों को स्वावलंबन अपनाने और घरेलू नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया है. वेम्बू का मानना है कि केवल विदेशों में उपलब्धियां हासिल करने से भारत का समुचित विकास नहीं हो सकता, बल्कि भारतीयों को अपनी तकनीकी क्षमताओं को अपने देश में ही विकसित करना होगा.
आत्मनिर्भरता की जरूरत
श्रीधर वेम्बू ने कहा कि भारत को अपनी तकनीकी और व्यापारिक क्षमताओं को आंतरिक रूप से मजबूत करना होगा. उनका मानना है कि जब तक भारत में ही नवीनतम तकनीकों का विकास नहीं होगा और उत्पादों और सेवाओं पर विदेशों की निर्भरता कम नहीं होगी, तब तक देश की समृद्धि और सम्मान को सुनिश्चित करना मुश्किल होगा. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "दुनिया में असली सम्मान प्राप्त करने के लिए भारतीयों को भारत में गहरी क्षमताएँ विकसित करनी होंगी. विदेशों में उपलब्धियां हासिल करने से काम नहीं चलेगा."
To earn true respect in the world, Indians have to develop deep capabilities in India. Achievements abroad won't do it.
I hope smart Indians keep this in mind.— Sridhar Vembu (@svembu) December 28, 2024Also Read
घरेलू नवाचार का महत्व
वेम्बू ने यह भी बताया कि भारतीय कंपनियों और उद्यमियों को भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार तकनीक और समाधान तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इसके बजाय, यदि हम केवल विदेशी उत्पादों और सेवाओं पर निर्भर रहते हैं, तो हम अपने देश की क्षमता को नकार रहे हैं. उनका दृष्टिकोण यह है कि यदि हम भारत की जरूरतों को समझते हुए तकनीकी समाधान विकसित करेंगे, तो इससे न केवल हमारे देश का विकास होगा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा.
भारतीय प्रतिभाओं को भारत में बनाए रखना होगा
वेम्बू ने भारतीय प्रतिभाओं की महत्ता को भी रेखांकित किया और बताया कि भारत में ही इन प्रतिभाओं को बनाए रखने और विकसित करने के लिए काम करना जरूरी है. उन्होंने कहा, "एक भारतीय होने के नाते, मैं भारत में प्रतिभाओं को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करता हूं क्योंकि हमें भारत की तकनीकी क्षमता को विकसित करने के लिए इन प्रतिभाओं की सख्त जरूरत है." वेम्बू ने अमेरिका के मॉडल से तुलना की, जहां लंबे समय से विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भरता रही है. वेम्बू का सुझाव था कि भारत को एक ऐसा मॉडल अपनाना चाहिए, जो स्थानीय कौशल को बढ़ावा दे और इससे दीर्घकालिक और सतत विकास संभव हो.
समानता और समग्र विकास
वेम्बू ने राष्ट्रीय विकास में समानता की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय विकास तभी संभव है जब समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलें." वेम्बू का मानना है कि यदि बड़े हिस्से को पीछे छोड़ दिया जाता है, तो असल में देश का विकास अधूरा रहेगा. उन्होंने यह सवाल उठाया, "क्या यह गर्व की बात है कि हम जीडीपी या ए.आई. में नंबर वन बन जाएं, अगर यह विदेशी प्रतिभाओं के बल पर हो, और हमारे अपने लोग पीछे रह जाएं?" यह बयान उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है कि किसी देश की वास्तविक समृद्धि तभी संभव है जब सभी नागरिकों को समान रूप से अवसर प्राप्त हों.
दीर्घकालिक दृष्टिकोण की आवश्यकता
वेम्बू ने सरकारों और कंपनियों को चेतावनी दी कि वे शॉर्ट-टर्म लाभ की बजाय दीर्घकालिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दें. उनका मानना है कि केवल आर्थिक आंकड़ों से किसी देश की वास्तविक स्थिति का निर्धारण नहीं किया जा सकता है, बल्कि यह आवश्यक है कि विकास की प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों को भी शामिल किया जाए.