शेयर बाजार में शानदार वापसी, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी, इन शेयरों ने कराई तगड़ी कमाई
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ. निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा, जबकि सेंसेक्स और बैंक निफ्टी में भी अच्छी तेजी रही. कई प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली.
सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने मजबूती के साथ नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत की. दिनभर खरीदारी का माहौल बना रहा और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए. वैश्विक संकेतों में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू निवेशकों की सक्रिय खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया.
बाजार में पूरे दिन रही खरीदारी की धार
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निवेशकों का भरोसा बाजार में साफ दिखाई दिया. निफ्टी 50 इंडेक्स 229 अंक की बढ़त के साथ 23,996 पर बंद हुआ और 24,000 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया. वहीं सेंसेक्स 776 अंक चढ़कर 76,836 पर बंद हुआ. बैंक निफ्टी भी 394 अंक मजबूत होकर 57,087 के स्तर पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये ने मजबूती दिखाई और डॉलर के मुकाबले 65 पैसे की बढ़त के साथ 95.91 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान अधिकांश सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का उत्साह बना रहा.
इन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती
दिन के कारोबार में कई शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया. कारट्रेड टेक करीब 12 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे बड़े गेनर्स में शामिल रहा. सेंको गोल्ड में लगभग 9 प्रतिशत और लॉरस लैब्स में 7.57 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसके चलते यह दिन का प्रमुख स्टॉक बना.
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इसके अलावा मार्कसन्स फार्मा भी 6.3 प्रतिशत चढ़ा. दूसरी ओर कुछ शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली. सीएम इंडिया प्रोजेक्ट्स और रिलायंस इंफ्रा में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि शक्ति पंप्स और जेन टेक भी कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे.
इन कारणों से मजबूत रहा बाजार का रुख
बाजार को कई सकारात्मक संकेतों का समर्थन मिला. वैश्विक स्तर पर युद्ध संबंधी तनाव कम होने के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट, अमेरिकी बाजार डाओ जोंस की मजबूती और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने माहौल बेहतर बनाया.
इसके अलावा सप्ताहांत में कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों और शुक्रवार को प्रमुख सपोर्ट स्तर से बाजार की वापसी ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया. हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की हल्की बिकवाली, एशियाई बाजारों की सुस्ती, मासिक एक्सपायरी से पहले बढ़ती अस्थिरता और वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता जैसे जोखिम अभी भी बाजार के सामने बने हुए हैं.