1 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी करते हुए निवेशकों को राहत दी है. पिछले दो दिनों की गिरावट के बाद बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया. इसके साथ ही निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी का मौका भुनाया. शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ ऊपर चढ़ते नजर आए.
मध्य पूर्व में जारी तनाव के कम होने की उम्मीद ने बाजार को सबसे बड़ा सहारा दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से संकेत मिला कि ईरान के साथ चल रहा सैन्य संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है. ईरानी नेतृत्व की ओर से भी बातचीत के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसका असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जो घटकर 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गईं. तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंता कम हुई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना और निवेशकों ने जोखिम लेने की हिम्मत दिखाई.
हालिया गिरावट के बाद कई शेयर आकर्षक स्तरों पर पहुंच गए थे, जिससे निवेशकों ने जमकर खरीदारी की. इसे वैल्यू बाइंग कहा जाता है, जहां निवेशक कम कीमत पर अच्छे शेयर खरीदते हैं. लगभग सभी सेक्टरों में तेजी देखी गई, जिससे बाजार की चौड़ाई मजबूत रही. खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज हुई. पिछले सत्र में टैक्स हार्वेस्टिंग के कारण कई शेयरों में तेज गिरावट आई थी, जो अब रिकवरी की ओर बढ़ते नजर आए. इससे बाजार में तेजी को और मजबूती मिली.
बैंकिंग सेक्टर, जो पिछले दिनों दबाव में था, इस तेजी में आगे रहा. बैंक निफ्टी में जोरदार उछाल देखा गया, क्योंकि निवेशकों ने इसे रिकवरी का अच्छा मौका माना. विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग शेयरों में हालिया गिरावट बुनियादी कारणों की बजाय अस्थायी कारणों से थी. ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अवसर के रूप में उभरा. निजी बैंकों के शेयरों में खासतौर पर खरीदारी देखी गई, जिससे पूरे बाजार को मजबूती मिली.
बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX लगभग 10% गिरकर 25 के स्तर पर आ गया. यह संकेत है कि निवेशकों में डर कम हुआ है और बाजार में स्थिरता लौट रही है. अस्थिरता कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वे ज्यादा जोखिम लेने को तैयार होते हैं. इसके साथ ही एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख देखने को मिला, जिसने भारतीय बाजार को और समर्थन दिया. कुल मिलाकर, वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी के मेल से बाजार ने मजबूत वापसी की.