भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर करने का एलान किया है. हालांकि यह आरबीआई के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा भुगतान है लेकिन फिर भी यह सरकार के बजट अनुमान 3.16 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है. आरबीआई ने यह भी बताया कि 31 मार्च 2026 तक उसकी बैलेंस शीट 20% से ज्यादा बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये की हो गई है.
विदेशी मुद्रा के कामकाज, निवेश और करेंसी से जुड़ी गतिविधियों में हुए फायदे की वजह से इस साल आरबीआई की कमाई में तगड़ी बढ़ोतरी हुई है. कमाई के साथ-साथ केंद्रीय बैंक ने अपने खर्च भी बढ़ाए हैं और आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए एक बड़ी रकम अलग सुरक्षित रखी है. आरबीआई ने आपातकालीन फंड में 1.09 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं ताकि भविष्य में किसी भी वित्तीय संकट से निपटा जा सके. इस फंड को बैलेंस शीट के 6.5% के स्तर पर बरकरार रखा गया है.
आर्थिक जानकारों को पहले से ही उम्मीद थी कि आरबीआई इस बार 2.7 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये के बीच मुनाफा ट्रांसफर कर सकता है. पिछले साल आरबीआई ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये दिए थे. जानकारों का मानना है कि यह रकम बहुत बड़ी है लेकिन फिर भी यह सरकार को उसके 4.3% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में पूरी तरह मदद करने के लिए शायद काफी न हो.
इसके बावजूद यह मुनाफा सरकार के लिए ऐसे समय में बड़ा सहारा बनेगा जब वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है. महंगे कच्चे तेल की वजह से आयात का खर्च बढ़ा है जिससे रुपया कमजोर हुआ है और चालू खाता घाटा भी बढ़ा है. इस साल भारतीय रुपया करीब 7% तक टूट चुका है और बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई है.
इस रिकॉर्ड मुनाफे के पीछे मुख्य वजह विदेशी मुद्रा भंडार और निवेश से हुई कमाई है. इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर और फायनेंशियल ईयर 2026 के दौरान सोने की कीमतों में आई भारी तेजी ने भी आरबीआई के मुनाफे को बढ़ाने में मदद की. बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाने के लिए आरबीआई ने बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीदे हैं जिससे उसकी बैलेंस शीट का आकार काफी बड़ा हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि इस भुगतान से सरकार को एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच मिला है.