RBI ने दी बड़ी राहत, 5 महीने में तीसरी बार रेपो रेट घटाया, अब घटेगी लोन की EMI
गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 4 जून से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक के समापन के बाद इस निर्णय की घोषणा की गई.
RBI MPC Meeting: गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 4 जून से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक के समापन के बाद इस निर्णय की घोषणा की गई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को प्रमुख ऋण दर या रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती की, जिससे यह 6% से घटकर 5.5% हो गई.
गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 4 जून से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक के समापन के बाद इस निर्णय की घोषणा की गई. अप्रैल में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद यह लगातार तीसरी दर कटौती है.
आरबीआई की अहम बातें
आरबीआई गवर्नर ने कहा, 'विकसित हो रहे व्यापक आर्थिक और वित्तीय विकास तथा भविष्य के आर्थिक परिदृश्य के विस्तृत आकलन के बाद एमपीसी ने तरलता समायोजन सुविधा के अंतर्गत ब्याज दर को 50 आधार अंकों से घटाकर 5.5% करने का निर्णय लिया है, जो कि अपेक्षित भी है. परिणामस्वरूप, स्थायी जमा सुविधा दर, जो कि एसडीएफ दर है, 5.25% पर समायोजित हो जाएगी.'
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अप्रैल में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद यह लगातार तीसरी दर कटौती है.
संजय मल्होत्रा ने आरबीआई के रुख में बदलाव की भी घोषणा की. आरबीआई ने अपने पहले के उदार रुख को बदलकर तटस्थ रुख अपना लिया है.
मल्होत्रा ने कहा, 'फरवरी 2025 से लगातार नीतिगत रेपो दर में 100 आधार अंकों की कटौती करने के बाद, मौद्रिक नीति समिति ने भी महसूस किया कि वर्तमान परिस्थितियों में, मौद्रिक नीति के पास अब विकास को समर्थन देने के लिए बहुत सीमित गुंजाइश बची है. इसलिए, एमपीसी ने भी रुख को उदार से बदलकर तटस्थ करने का फैसला किया है.'
आरबीआई गवर्नर ने आगे कहा कि अब से एमपीसी आने वाले आंकड़ों और उभरते परिदृश्य का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करेगी, ताकि सही विकास-मुद्रास्फीति संतुलन बनाने के लिए मौद्रिक नीति की भावी दिशा तय की जा सके.
उन्होंने कहा, 'तेजी से बदलती वैश्विक आर्थिक स्थिति के कारण उभरते व्यापक आर्थिक परिदृश्य की निरंतर निगरानी और आकलन आवश्यक हो गया है.'