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क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर आएगा बड़ा उछाल? 30 मई के ताजा रेट ने बढ़ाई हलचल

30 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें चर्चा का विषय बनी हुई हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है.

ANI
Reepu Kumari

नई दिल्ली: देश में ईंधन की कीमतों पर एक बार फिर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं. 30 मई 2026 को जारी ताजा दरों ने आम उपभोक्ताओं से लेकर परिवहन क्षेत्र तक सभी का ध्यान खींचा है. अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर लोगों के दैनिक खर्च पर पड़ता दिखाई दे रहा है.

हालांकि सरकार ने घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति सामान्य बनाए रखने का भरोसा दिया है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार में बने दबाव का असर ईंधन की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. कई बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमतें पहले ही 100 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर चुकी हैं.

दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 

नई दिल्ली में 29 मई को पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर थी, जबकि कोलकाता में यह 113.51 रुपये प्रति लीटर है. मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.18 रुपये प्रति लीटर है.

चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.84 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई. एनसीआर शहरों में, गुरुग्राम में पेट्रोल की कीमत 102.97 रुपये है. नोएडा में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये है. वहीं, बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 110.93 रुपये है.

आज के डीजल के दाम शहरवार

नई दिल्ली में 30 मई को डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर थी. कोलकाता में डीजल की कीमत 99.82 रुपये प्रति लीटर है. मुंबई में यह दर 97.83 रुपये है. चेन्नई में डीजल की कीमत 99.78 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई. एनसीआर शहरों में, गुरुग्राम में डीजल की कीमत 95.83 रुपये है. नोएडा में डीजल की कीमत 95.37 रुपये है. वहीं, बेंगलुरु में डीजल की कीमत 98.80 रुपये है.

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

ईरान में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के बावजूद, सरकार ने घरेलू एलपीजी, घरेलू पीएनजी और सीएनजी (परिवहन) की 100% आपूर्ति सुनिश्चित की है. वाणिज्यिक एलपीजी के लिए अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई है. इसके अलावा, फार्मा, इस्पात, ऑटोमोबाइल, बीज, कृषि आदि क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी गई है.