नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोजाना अपडेट होती हैं. हर सुबह करीब 6 बजे देश की सरकारी तेल कंपनियां नए रेट जारी करती हैं. इन दरों को तय करते समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है.
ईंधन की कीमतें केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि इनका असर पूरे आर्थिक ढांचे पर पड़ता है. रोजाना ऑफिस आने जाने वाले लोग, ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसाय, टैक्सी चालक और छोटे व्यापारी सभी की लागत पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है. इसी कारण लोग हर दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नजर बनाए रखते हैं.
आज यानी 08 मार्च 2026 को देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सामने आ गई हैं. अलग अलग राज्यों में टैक्स और स्थानीय शुल्क अलग होने के कारण हर शहर में कीमतों में थोड़ा अंतर दिखाई देता है.
पिछले कुछ समय से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला है. मई 2022 में केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने ईंधन पर लगने वाले टैक्स में कटौती की थी. इसके बाद से कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं.
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों को संतुलित रखने की कोशिश की जाती है. जानकारों का कहना है कि सरकार की कर नीति और बाजार की स्थिति के कारण ईंधन के रेट में बड़े उतार चढ़ाव कम देखने को मिले हैं.
पेट्रोल और डीजल का उत्पादन कच्चे तेल से किया जाता है. यदि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चे तेल के रूप में आयात करता है. इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है. ऐसे में यदि रुपया कमजोर होता है तो तेल आयात करना महंगा हो जाता है.
पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है. अलग अलग राज्यों में टैक्स की दर अलग होने के कारण कीमतों में अंतर दिखाई देता है.
कच्चे तेल को सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसे रिफाइनरी में प्रोसेस कर पेट्रोल और डीजल में बदला जाता है. इस प्रक्रिया में होने वाला खर्च भी अंतिम कीमत में शामिल होता है.
बाजार में ईंधन की मांग और उपलब्धता भी कीमतों को प्रभावित करती है. जब मांग ज्यादा होती है और आपूर्ति सीमित होती है तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. खासकर यात्रा के मौसम और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ जाती है.