15 नहीं 20 लाख की सैलरी होगी टैक्स फ्री? प्री बजट मीट में उद्योगपतियों ने सरकार को बता दिया गुरु मंत्र

Budget 2025 Income Tax relief: 1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट पेश करेंगी. इस बजट में सरकार कई बड़े ऐलान कर सकती है. सबसे बड़ा टैक्स को लेकर हो सकता है. बजट से पहले उद्योगपतियों के साथ प्री बजट की बैठक की गई.

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Gyanendra Tiwari

Budget 2025 Income Tax relief: भारत में आगामी 2025-26 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, और उससे पहले सरकार ने उद्योगपतियों के साथ अपनी प्री-बजट बैठक की. इस बैठक में विभिन्न उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों ने कई अहम सुझाव दिए, जिनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना, और मध्यवर्गीय परिवारों की आय को बढ़ाना है. इनमें एक प्रमुख मांग व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती करने की थी, ताकि ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम हो सके और उपभोक्ताओं की खपत बढ़े. इस बैठक में यह भी मुद्दा उठाया गया कि 20 लाख रुपये की सालाना इनकम पर टैक्स न लगे. 

20 लाख तक की इनकम पर नहीं लगेगी इनकम टैक्स?

कई उद्योग संगठनों ने सुझाव दिया कि 20 लाख रुपये तक की आय पर आयकर दरों में राहत दी जाए. इससे लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा आएगा, जो न केवल उपभोक्ता खपत को बढ़ाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में रिवेन्यू भी जेनरेट करेगा. CII के अध्यक्ष संजीव पुरी ने कहा कि इससे उपभोक्ताओं के पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम होगी और यह एक सकारात्मक चक्र बनाएगा, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी.

चीन पर कम निर्भर होने का दिया सुझाव

बैठक में उद्योगपतियों ने चीन द्वारा भारत में और अन्य देशों में अत्यधिक स्टॉक की सप्लाई करने की समस्या भी उठाई. CII अध्यक्ष ने बताया कि चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण उनका माल भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में आ रहा है, जो भारतीय उद्योगों के लिए चुनौती बन सकता है. इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन और उसके कारण खाद्य सुरक्षा और महंगाई की समस्या को भी बैठक में उठाया गया.

रोजगार-सृजन वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देने की बात

उद्योगपतियों ने यह भी सुझाव दिया कि उन क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाए जिनमें रोजगार सृजन की क्षमता अधिक है. इन क्षेत्रों में कपड़ा उद्योग, जूता निर्माण, पर्यटन, और फर्नीचर उद्योग शामिल हैं. इसके साथ ही, MSME (सूक्ष्म, छोटे और मझले उद्योगों) के लिए भी सरकार से कुछ कदम उठाने की अपील की गई. ये उद्योग देश के रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके समग्र विकास से भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.

पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी में कमी

उद्योग निकायों ने पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी में कुछ कमी करने का भी सुझाव दिया. इससे तेल और गैस की कीमतों में कमी आएगी और उपभोक्ताओं के पास अधिक पैसा रहेगा, जो अन्य आवश्यक वस्तुओं की खपत में लगेगा. इस प्रकार, यह कदम भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक परिणाम ला सकता है.

GST और अन्य टैक्स सुधारों की आवश्यकता

बैठक में GST की जटिलताओं को दूर करने की भी बात की गई. PHDCCI के अध्यक्ष हिमंत जैन ने कहा कि GST प्रणाली को सरल बनाया जाना चाहिए ताकि छोटे और मझले व्यापारियों को राहत मिले. इसके साथ ही, व्यक्तिगत आयकर में राहत देने के सुझाव पर जोर दिया गया, जिससे खपत बढ़ सके और महंगाई में कमी आ सके.

MSME सेक्टर के लिए सिंगल विंडो सिस्टम

Assocham के अध्यक्ष संजय नायर ने एमएसएमई सेक्टर के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की मांग की, ताकि इन उद्योगों को ज्यादा आसानी से और जल्दी से सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके. इसके साथ ही, टैक्सेशन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, खासकर TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) प्रणाली को आसान बनाने की बात की गई.