क्या है MSCI रीबैलेसिंग जिसने हिला डाला शेयर बाजार? 1000 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी 360 अंक साफ
शुक्रवार दोपहर भारतीय शेयर बाजार में अचानक भारी गिरावट आई जिससे सेंसेक्स 1000 अंक और निफ्टी करीब 360 अंक टूट गया. इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह MSCI इंडेक्स की रीबैलेंसिंग और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रही.
मुंबई: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में कब क्या हो जाए कहना मुश्किल है. कुछ ऐसा ही शुक्रवार को हुआ जब मुनाफे की उम्मीद में बैठे निवेशकों को एक झटके में बड़ा नुकसान उठाना पड़ गया. दिनभर बढ़त के साथ कारोबार करने के बाद शुक्रवार दोपहर को भारतीय शेयर बाजार अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया.
सेंसेक्स में 1000 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट आई जबकि निफ्टी भी करीब 360 अंक नीचे फिसल गया. इस अचानक आई गिरावट के पीछे मुख्य वजह एमएससीआई इंडेक्स की रीबैलेंसिंग को माना जा रहा है. इसके अलावा वैश्विक अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर मानसून के अनुमान ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया.
क्या है एमएससीआई?
दरअसल एमएससीआई यानी मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल वैश्विक शेयर बाजार के इंडेक्स संभालता है जिन्हें दुनिया भर के बड़े निवेशक और फंड ट्रैक करते हैं. जब कोई शेयर इस इंडेक्स में शामिल होता है तो विदेशी निवेश बढ़ता है और बाहर होने पर बिकवाली का दबाव आता है. एमएससीआई हर तिमाही यानी फरवरी, मई, अगस्त और नवंबर में अपने इंडेक्स में बदलाव करता है जिसे 'रीबैलेंसिंग' कहा जाता है.
इस बार जो बदलाव लागू हुए उसके तहत फेडरल बैंक, MCX, NALCO और इंडियन बैंक को एमएससीआई ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में जगह मिली है. वहीं दूसरी तरफ हुंडई मोटर इंडिया, जुबिलेंट फूडवर्क्स, कल्याण ज्वैलर्स और आरवीएनएल को इस लिस्ट से बाहर कर दिया गया है.
बाजार बंद होते वक्त हुई बिकवाली
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार इस फेरबदल के कारण बाजार बंद होने के वक्त बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू हो गई. अनुमान है कि इस बदलाव की वजह से भारतीय बाजारों से करीब 8,000 करोड़ रुपये बाहर निकल गए. नतीजा यह हुआ कि दोपहर में जो सेंसेक्स 75,500 के आसपास था, वह कुछ ही मिनटों में गिरकर लगभग 74,700 पर आ गया. इसी तरह निफ्टी भी 23,780 के स्तर से टूटकर 23,518 के करीब पहुंच गया.
इस गिरावट में ओएनजीसी, एनटीपीसी, बीपीसीएल और इंडियन ऑयल जैसे एनर्जी सेक्टर के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. जानकारों का कहना है कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है. हालांकि इस बड़ी गिरावट के बीच भी मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में मजबूती देखी गई जिससे पता चलता है कि छोटे निवेशकों का भरोसा अब भी चुनिंदा सेक्टरों पर बना हुआ है.