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India Daily

इस कंपनी ने AI पर लगाया बड़ा दांव! फिर शुरू हुआ छंटनी का दौर, हजारों लोगों की नौकरियों पर मंडराया संकट

मेटा अपने कार्यबल में 20 प्रतिशत की कटौती कर 15,000 कर्मचारियों को बाहर करने की तैयारी में है. यह कदम कंपनी के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश और भविष्य की तकनीकी रणनीतियों का हिस्सा है.

KanhaiyaaZee
इस कंपनी ने AI पर लगाया बड़ा दांव! फिर शुरू हुआ छंटनी का दौर, हजारों लोगों की नौकरियों पर मंडराया संकट
Courtesy: Grok

नई दिल्ली: फेसबुक की मूल कंपनी मेटा एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई नया फीचर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर होने वाली छंटनी है. मार्क जकरबर्ग के नेतृत्व में कंपनी अपने खर्चों को कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए करीब 15,000 नौकरियों को खत्म करने की योजना बना रही है. यह निर्णय वैश्विक तकनीक जगत में हलचल पैदा कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि कंपनी का ध्यान अब पारंपरिक टीम वर्क से हटकर पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर है.

दिसंबर के आंकड़ों के अनुसार मेटा के पास लगभग 79 हजार कर्मचारी थे. अब कंपनी अपने कुल कार्यबल के 20 प्रतिशत हिस्से को हटाने वाली है. इसका मतलब है कि दुनिया भर से लगभग 15 हजार लोगों को अपनी आजीविका खोनी पड़ेगी. हालांकि अभी इस छंटनी के लिए किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन आंतरिक रूप से बड़े अधिकारियों को इस बदलाव के लिए तैयार रहने के निर्देश दे दिए गए हैं.

एआई पर बड़ा दांव 

मेटा की इस छंटनी के पीछे एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में उसका भारी निवेश है. मार्क जकरबर्ग की योजना साल 2028 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 600 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करने की है. भारतीय रुपयों में यह राशि 55 लाख करोड़ रुपये के करीब बैठती है. कंपनी भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रही है और एआई को अपनी विकास यात्रा का मुख्य आधार मान रही है.

बदलती कार्य संस्कृति 

मार्क जकरबर्ग का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जटिल कार्यों को सरल बनाने की क्षमता रखता है. उनका तर्क है कि जिस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पहले एक बड़ी टीम की जरूरत पड़ती थी, अब उसे एक प्रतिभाशाली व्यक्ति एआई की मदद से अकेले कर सकता है. जकरबर्ग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य में बड़ी टीमों के बिना भी विशाल प्रोजेक्ट्स को कुशलतापूर्वक संचालित किया जा सकेगा.

छंटनी का पुराना सिलसिला 

मेटा के लिए छंटनी का यह दौर नया नहीं है. इससे पहले नवंबर 2022 में कंपनी ने 11,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. उसके ठीक चार महीने बाद एक बार फिर 10 हजार लोगों की छंटनी की गई थी. अगर ताजा योजना लागू होती है, तो यह कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी कार्यबल कटौती साबित होगी. बार-बार होने वाली इन कटौतियों ने कर्मचारियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है.

तकनीकी जगत में हलचल 

मेटा के इस फैसले का असर केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए एक मिसाल बनेगा. एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच अन्य दिग्गज कंपनियां भी इसी राह पर चल सकती हैं. नौकरियों में कटौती और मशीनी दक्षता के बीच का यह संतुलन आने वाले समय में रोजगार के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकता है. फिलहाल, हजारों कर्मचारी अपनी भविष्य की नौकरी को लेकर संशय और चिंता के साए में हैं.