Jio Platforms के IPO को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है. IPO में आवेदन करने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन किस श्रेणी में आवेदन कर सकता है, शेयर मिलने की संभावना कैसे तय होती है और आवेदन के दौरान पैसा कब तक ब्लॉक रहता है.
मुख्य बोर्ड के IPO में निवेशकों को आम तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है. रिटेल निवेशक ₹2 लाख तक की बोली लगाते हैं. नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) ₹2 लाख से अधिक की बोली लगाते हैं. इस श्रेणी में छोटे और बड़े HNI निवेशक शामिल होते हैं. तीसरी श्रेणी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की है, जिसमें म्यूचुअल फंड, बैंक और बीमा कंपनियों जैसे पात्र संस्थागत निवेशक आते हैं.
Jio Platforms के IPO में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र मौजूदा शेयरधारकों और पात्र कर्मचारियों के लिए भी आरक्षित हिस्से का प्रावधान बताया गया है.
IPO में आवेदन अपने ब्रोकर, बैंक या अधिकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जा सकता है. इसके लिए सही निवेशक श्रेणी चुनें, PAN और डीमैट खाते की जानकारी भरें तथा बोली की रकम दर्ज करें. इसके बाद UPI या ASBA के जरिए भुगतान की अनुमति देनी होती है. शेयरधारक और कर्मचारी श्रेणी में आवेदन करने वालों को संबंधित पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी.
इस श्रेणी में किसी निर्धारित कंपनी के पात्र मौजूदा शेयरधारकों को IPO में आवेदन का अवसर दिया जाता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Jio Platforms के ₹30,213 करोड़ के प्रस्तावित IPO में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए 2,500 रुपए करोड़ का हिस्सा आरक्षित रखा गया है. इस श्रेणी में अधिकतम ₹2 लाख की बोली लगाई जा सकती है.
शेयरधारक कोटे के लिए पात्र बनने हेतु रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 13 अक्टूबर तक खरीदना जरूरी था. कंपनी की ओर से पात्रता की कट-ऑफ तारीख 14 अक्टूबर बताई गई थी. भारत की T+1 सेटलमेंट व्यवस्था में शेयर खरीदने के बाद उन्हें डीमैट खाते में आने में एक कारोबारी दिन लगता है. इसलिए 14 अक्टूबर को शेयर खरीदने वाले निवेशक इस कोटे के पात्र नहीं बनते.
रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी सहायक कंपनियों के पात्र कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ का हिस्सा आरक्षित बताया गया है. इस श्रेणी में अधिकतम ₹5 लाख की बोली लगाई जा सकती है. आवेदन के समय कर्मचारियों को संबंधित पहचान संबंधी जानकारी देनी होगी और IPO के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा.
IPO खुलने के शुरुआती दिन या आखिरी दिन आवेदन करने से शेयर मिलने की संभावना अपने आप नहीं बढ़ती. निवेशक को आवेदन के लिए पर्याप्त समय रखना चाहिए, ताकि तकनीकी या भुगतान संबंधी परेशानी न हो. सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार और मूल्यांकन को भी देखना चाहिए.
आखिरी दिन आवेदन करने का एक फायदा यह हो सकता है कि निवेशक को सब्सक्रिप्शन की स्थिति समझने का अधिक समय मिल जाता है. हालांकि, इससे शेयर मिलने की गारंटी नहीं होती.
एक ही PAN के जरिए एक ही IPO में एक ही श्रेणी के तहत कई आवेदन करने पर डुप्लीकेट आवेदन मानकर उन्हें खारिज किया जा सकता है. इसलिए केवल अलग-अलग डीमैट खाते होने से अलॉटमेंट की संभावना नहीं बढ़ती.
परिवार के अलग-अलग पात्र सदस्य अपने PAN और खातों से स्वतंत्र आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, प्रत्येक आवेदन को IPO के नियमों और पात्रता शर्तों का पालन करना होगा.
यदि कोई निवेशक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारक कोटे के लिए पात्र है, तो वह उस श्रेणी के साथ रिटेल श्रेणी में भी अलग आवेदन कर सकता है, बशर्ते IPO के अंतिम दस्तावेज इसकी अनुमति देते हों. लेकिन रिटेल और NII श्रेणियों में एक साथ आवेदन नहीं किया जा सकता. ₹2 लाख तक की बोली रिटेल श्रेणी में और इससे अधिक की बोली NII श्रेणी में आती है.
UPI या ASBA के जरिए आवेदन करने पर रकम बैंक खाते में ब्लॉक होती है, तुरंत कटती नहीं है. शेयर मिलने पर जरूरी रकम खाते से काट ली जाती है. शेयर नहीं मिलने या पूरा अलॉटमेंट न होने की स्थिति में संबंधित ब्लॉक रकम रिलीज कर दी जाती है.
अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेयर आम तौर पर लिस्टिंग से पहले निवेशक के डीमैट खाते में जमा कर दिए जाते हैं. मुख्य बोर्ड के IPO में मौजूदा T+3 कार्यदिवस व्यवस्था के तहत, इश्यू बंद होने के बाद सामान्यतः तीन कार्यदिवस में लिस्टिंग होती है. सही तारीख संबंधित IPO के आधिकारिक कार्यक्रम पर निर्भर करती है.
IPO में शेयर मिलना उसकी मांग, निवेशक श्रेणी और उपलब्ध शेयरों के मुकाबले आवेदन की संख्या पर निर्भर करता है. पात्र परिवार के सदस्य अलग-अलग आवेदन कर सकते हैं और पात्र निवेशक नियमों के अनुसार आरक्षित श्रेणियों का लाभ ले सकते हैं. लेकिन कोई तरीका अलॉटमेंट की गारंटी नहीं देता. निवेश से पहले IPO के आधिकारिक दस्तावेजों में दी गई तारीखों, पात्रता और जोखिमों की जांच जरूर करें.