महंगाई का डबल अटैक! पहले खुदरा ने झटका दिया, अब थोक महंगाई ने बढ़ाई टेंशन
जून में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.87% और खुदरा महंगाई 4.38% पर पहुंच गई. खाद्य वस्तुओं और प्राथमिक उत्पादों की कीमतों में तेजी से आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ा है, जिससे आरबीआई की चिंता भी गहरी हो गई है.
देश में महंगाई एक बार फिर लोगों की जेब पर भारी पड़ती दिख रही है. जून महीने के आंकड़ों के अनुसार खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खाद्य वस्तुओं, प्राथमिक उत्पादों और आपूर्ति लागत में बढ़ोतरी का असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि थोक स्तर पर कीमतें बढ़ने का असर आने वाले महीनों में खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ताओं का खर्च और बढ़ने की आशंका है.
थोक महंगाई में बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता
जून महीने में थोक मूल्य सूचकांक WPI आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 9.68% थी. आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक उत्पादों की महंगाई 4.99% से बढ़कर 7% हो गई. वहीं खाद्य महंगाई भी 4.49% से बढ़कर 5.49% दर्ज की गई. हालांकि ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई कुछ कम होकर 27.41% रही, लेकिन विनिर्मित उत्पादों की महंगाई 7.48% पर स्थिर रही. विशेषज्ञों का मानना है कि थोक स्तर पर बढ़ती लागत का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना फिलहाल कम नजर आती है.
खुदरा महंगाई भी आरबीआई के लक्ष्य से ऊपर
जून में खुदरा महंगाई दर 4.38% रही, जो मई के 3.93% से अधिक है. यह स्तर भारतीय रिजर्व बैंक के 4% लक्ष्य से ऊपर है. खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32% हो गई, जबकि कोर महंगाई भी 4.1% तक पहुंच गई. रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक खाने-पीने की चीजें, परिवहन और अन्य जरूरी सेवाएं महंगी होने से लोगों की खर्च करने की क्षमता पर दबाव बढ़ा है.
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वैश्विक हालात और RBI की बढ़ी चुनौती
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता का असर कच्चे तेल की आपूर्ति और लागत पर पड़ा है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक घटनाओं का सीधा असर घरेलू महंगाई पर दिखाई देता है. इसी बीच आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया है, जबकि आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.6% किया गया है. ऐसे में केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक विकास को गति देने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है.