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India Daily

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को काउंटर करने के लिए भारत ने बनाया खास प्लान, जानें क्या है खास

भारत और अमेरिका के प्रधानमंत्रियों के बीच 13 फरवरी को वाशिंगटन में हुई बैठक में 'मिशन 500' की शुरुआत की गई, जिसमें दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $500 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. दोनों देशों का यह प्रयास है कि वे अपने व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के साथ-साथ बाजारों तक पहुंच बढ़ाएं, शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करें, और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को मजबूत करें.

Gyanendra Tiwari
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को काउंटर करने के लिए भारत ने बनाया खास प्लान, जानें क्या है खास
Courtesy: Social Media

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए दोनों देशों ने मिलकर कई अहम कदम उठाए हैं. इसी कड़ी में, भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित पारस्परिक टैरिफ (reciprocal tariffs) का मुकाबला करने के लिए एक खास योजना तैयार की है.

क्या है भारत का नया प्लान?

भारत, अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के लिए $500 बिलियन तक का लक्ष्य 2030 तक तय कर चुका है. इसके लिए दोनों देशों के बीच एक व्यापारिक समझौते पर भी बातचीत चल रही है, जिससे टैरिफ में कमी लाई जा सके और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाया जा सके. हालांकि, इस दौरान पारस्परिक टैरिफ (reciprocal tariffs) का मुद्दा अभी भी हल नहीं हुआ है.

भारत ने अमेरिका के उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ का मुकाबला करने के लिए एक रणनीति बनाई है. भारत सरकार के अधिकारियों के अनुसार, भारत यह साबित करने की योजना बना रहा है कि अधिकांश अमेरिकी उत्पादों पर भारत में 10 प्रतिशत से कम शुल्क लिया जाता है.

भारत की योजना में क्या होगा?

भारत का वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिसमें विभिन्न उत्पादों पर उनके आयात शुल्क की जानकारी दी जाएगी. यह रिपोर्ट अगले व्यापार वार्ता सत्र के दौरान अमेरिका को प्रस्तुत की जाएगी, जो अप्रैल से पहले हो सकती है. इस दौरान अमेरिका अपनी अंतिम सूची जारी कर सकता है, जिसमें विभिन्न देशों और उत्पादों के लिए प्रतिकारात्मक टैरिफ होंगे.

कम टैरिफ का उदाहरण

भारत में अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ सामान्यत: उच्च नहीं हैं. अधिकारियों के अनुसार, भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क को काफी कम रखा है. उदाहरण के लिए, भारत में अमेरिका के शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों पर औसतन 5 प्रतिशत से भी कम शुल्क लगता है. यह दोनों देशों के बीच व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.