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जुलाई-अगस्त में होने वाली बारिश स्टॉक मार्केट के लिए कितनी जरूरी, होगी छप्परफाड़ कमाई या उठाना पड़ेगा नुकसान?

IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री, गौरा सेनगुप्ता का कहना है, "जुलाई और अगस्त के दौरान बारिश सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस समय तक अधिकांश खड़ी फसलें बोई जा चुकी होती हैं. "

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Gyanendra Tiwari

भारत में मानसून का कृषि और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ता है, लेकिन क्या यही बारिश स्टॉक मार्केट के लिए भी उतनी महत्वपूर्ण होती है? अक्सर मानसून के अच्छे होने की उम्मीद से लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं, लेकिन क्या सच में बारिश का असर बाजार पर उतना सीधा होता है? आइए इस पर विस्तार से जानते हैं.

आमतौर पर यह माना जाता है कि अच्छी बारिश से कृषि उत्पादन बढ़ता है, जिससे अर्थव्यवस्था में मजबूती आती है और इसका सकारात्मक असर स्टॉक मार्केट पर भी पड़ता है. लेकिन, एक गहरे विश्लेषण से यह सामने आया है कि मानसून के अच्छे होने का शेयर बाजार पर कोई स्थिर या सीधा असर नहीं दिखता.

मानसून और स्टॉक मार्केट: क्या है संबंध?

एक विश्लेषण के अनुसार, जिन वर्षों में सामान्य या सामान्य से अधिक मानसून होता है, वहां शेयर बाजार में किसी स्थिर सकारात्मक रुझान का पता नहीं चलता. उदाहरण के लिए, 2024 में बारिश 8% अधिक हुई थी, लेकिन बाजार में सिर्फ 1.2% की ही बढ़त देखी गई. हालांकि, खाद्यान्न उत्पादन में 5% का इजाफा हुआ, जिससे BSE कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और FMCG सब-इंडेक्स में 4% और 5% की बढ़त देखने को मिली. लेकिन अगर 2008 से अब तक के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो मानसून और शेयर बाजार के रुझान के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिलता.

जुलाई-अगस्त में बारिश का असर

हालांकि, अगर हम सिर्फ जुलाई और अगस्त महीने की बारिश पर ध्यान दें, तो एक अलग तस्वीर उभरकर सामने आती है. ये महीने मानसून के सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इस समय तक अधिकांश कृषि की बुआई हो चुकी होती है. जुलाई और अगस्त में बारिश का बाजार पर असर कमजोर रूप से देखा जाता है, खासकर जब बारिश देशभर में समान रूप से होती है और किसी एक राज्य तक सीमित नहीं होती.

विश्लेषण से यह सामने आया है कि सामान्य या अधिक बारिश (जो कि सामान्य से 10% से अधिक न हो) स्टॉक मार्केट के प्रदर्शन में अच्छा असर डालती है. उदाहरण के लिए, 2010 में जब मानसून अच्छा और समान रूप से वितरित हुआ था, तो बाजार में 14% की बढ़त हुई थी. वहीं, 2015 और 2018 में, जब मानसून औसत से कम था, तो बाजार में क्रमशः 4% और 2.5% की गिरावट आई.

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स और बारिश

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और FMCG इंडेक्स जैसे सेक्टरों में विशेष असर देखा जाता है. ये सेक्टर आमतौर पर ग्रामीण मांग पर अधिक निर्भर होते हैं, और बारिश का इन पर सीधा असर पड़ता है. अगर बारिश सामान्य और अच्छी तरह से वितरित होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में वृद्धि हो सकती है, जो इन सेक्टरों के लिए फायदेमंद साबित होती है.

2025 का मानसून और बाजार पर असर

IMD (Indian Meteorological Department) ने 2025 के मानसून का अनुमान जताया है कि बारिश औसतन 6% अधिक हो सकती है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के समय और वितरण पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए.

IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री, गौरा सेनगुप्ता का कहना है, "जुलाई और अगस्त के दौरान बारिश सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस समय तक अधिकांश खड़ी फसलें बोई जा चुकी होती हैं. वहीं, प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश का वितरण खासकर उन क्षेत्रों में अहम होता है, जहां सिंचाई की सुविधाएं कम होती हैं."

डिस्क्लेमर: यह खबर सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से लिखी गई है. हम किसी को कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं दे रहे हैं.