NCR में महंगे होते घरों से खरीदारों के हौसले पस्त, ब्रिकी में आई 40% की गिरावट
देश के सात प्रमुख शहरों में अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान आवासीय बिक्री में गिरावट दर्ज की गई. बढ़ती कीमतों, आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक परिस्थितियों के चलते कई खरीदारों ने घर खरीदने का फैसला टाल दिया.
नई दिल्ली: देश के रियल एस्टेट बाजार में इस साल दूसरी तिमाही के दौरान सुस्ती देखने को मिली है. रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी एनारॉक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच सात प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में छह प्रतिशत घट गई. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मकानों की लगातार बढ़ती कीमतें, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और रोजगार क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं ने खरीदारों के फैसलों को प्रभावित किया है.
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र, दिल्ली-एनसीआर, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में कुल 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 96,285 इकाइयों का था. हालांकि गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह संकेत देती है कि खरीदार फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और निवेश संबंधी फैसलों को टाल रहे हैं.
मकानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी
आवासीय बिक्री में कमी के बावजूद मकानों की औसत कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही. सातों प्रमुख शहरों में घरों की कीमतें औसतन सात प्रतिशत बढ़ीं. दिल्ली-एनसीआर में सबसे अधिक 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई. विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण लागत बढ़ने और बेहतर सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
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वैश्विक हालात का भी पड़ा असर
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कृत्रिम मेधा को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है. कई संभावित खरीदार फिलहाल आर्थिक स्थिरता का इंतजार कर रहे हैं. यही वजह है कि आवासीय बाजार में मांग अपेक्षाकृत धीमी दिखाई दे रही है.
कुछ शहरों ने दिखाया बेहतर प्रदर्शन
जहां अधिकांश शहरों में बिक्री घटी, वहीं बेंगलुरु और हैदराबाद ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया. बेंगलुरु में बिक्री में एक प्रतिशत और हैदराबाद में दो प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई. कोलकाता में सबसे ज्यादा 10 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली. यह संकेत देता है कि कुछ स्थानीय बाजार अब भी मजबूत मांग बनाए हुए हैं.
प्रीमियम आवास की मांग बरकरार
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रीमियम और लग्जरी आवासीय परियोजनाओं की मांग बनी हुई है. दूसरी ओर, नई परियोजनाओं की आपूर्ति सात प्रतिशत बढ़कर 1.06 लाख इकाइयों तक पहुंच गई. बुनियादी ढांचा विकास और रोजगार केंद्रों के आसपास स्थित प्रोजेक्ट्स खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी.