यूपी में अब अनफिट स्कूल वाहनों की अब खैर नहीं! 1 जुलाई से शुरू होगा 'मिशन सेफ फ्यूचर'
उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग 1 से 15 जुलाई तक मिशन सेफ फ्यूचर अभियान चलाएगा. अनफिट और बिना परमिट वाहनों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
लखनऊ: स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता देते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने राज्यव्यापी अभियान शुरू करने का फैसला किया है. परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह के निर्देश पर 1 जुलाई से 15 जुलाई तक 'मिशन सेफ फ्यूचर' चलाया जाएगा. इस विशेष अभियान के तहत स्कूल वाहनों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच की जाएगी. विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे की जान असुरक्षित वाहनों के कारण खतरे में न पड़े.
अभियान के पहले चरण में 1 से 7 जुलाई तक स्कूल प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को नोटिस, फोन और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से सचेत किया जाएगा. उनसे कहा जाएगा कि सभी स्कूल वाहनों की फिटनेस और वैध परमिट सुनिश्चित करें. परिवहन विभाग के अधिकारी स्कूलों में जाकर वाहनों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण भी करेंगे.
जोन और सेक्टर में बांटकर होगी निगरानी
परिवहन विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों को जोन और सेक्टर में विभाजित कर कार्य करें. प्रत्येक स्कूल का भौतिक सत्यापन किया जाएगा. वाहन सुरक्षा, चालक की पात्रता, दस्तावेजों की वैधता और अन्य आवश्यक मानकों की भी जांच होगी. इससे पूरे अभियान की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी.
Also Read
जिला स्तर पर होगी सुरक्षा समिति की बैठक
जुलाई के पहले सप्ताह में सभी जिलों में जिला विद्यालय यान सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की जाएगी. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली इन बैठकों में शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां शामिल होंगी. बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए आवश्यक मानकों को लागू करने पर विशेष जोर दिया जाएगा.
8 जुलाई से शुरू होगी सख्त कार्रवाई
अभियान के दूसरे चरण में 8 से 15 जुलाई तक प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी. पुलिस, यातायात और शिक्षा विभाग के सहयोग से बिना परमिट, बिना फिटनेस और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान और जब्ती की कार्रवाई होगी. निजी वाहनों की भी जांच की जाएगी, जो स्कूली बच्चों को ढो रहे हैं.
स्कूलों की मान्यता पर भी पड़ सकता है असर
परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बार-बार चेतावनी के बावजूद नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों की सूची जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा विभाग को भेजी जाए. ऐसे मामलों में संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है. विभाग का मानना है कि इससे स्कूल प्रबंधन सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लागू करेंगे.