Gold का 'गोल्डन टाइम' खत्म? मिडिल ईस्ट में जंग के बावजूद क्यों फीकी पड़ गई सोने की चमक
मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद सोने की कीमतों में बड़ी तेजी नहीं दिख रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोना सीमित दायरे में रह सकता है, हालांकि गिरावट पर निवेश के अवसर बन सकते हैं.
मुंबई: सोना लंबे समय से संकट के दौर में सबसे भरोसेमंद निवेश माना जाता रहा है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है. मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद सोने की कीमतें अपने पुराने रिकॉर्ड से काफी नीचे बनी हुई हैं. ऐसे में निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या सोने की तेजी का दौर अब धीमा पड़ चुका है.
किन कारणों से बदला सोने का रुख
इस साल की शुरुआत में सोने ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की थी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी, जबकि भारत के एमसीएक्स पर यह दो लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया था. इसके बाद बाजार में मुनाफावसूली बढ़ी और कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि एमसीएक्स पर इसका भाव लगभग 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है. इस गिरावट ने निवेशकों को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है.
सुपर रैली के पीछे कौन से कारक थे
ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोने की तेज़ रैली के पीछे कई अहम वजहें थीं. कम ब्याज दरें, आसान मौद्रिक नीति, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया के केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई खरीदारी ने कीमतों को लगातार सहारा दिया. हालांकि अब हालात बदल रहे हैं. वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होने लगी है, जिससे निवेशकों का रुझान धीरे-धीरे अन्य निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है. इसी कारण विशेषज्ञों को अब सोने में पहले जैसी लंबी तेजी की संभावना कम दिखाई दे रही है.
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आगे क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से पांच वर्षों में सोना अन्य एसेट क्लास की तुलना में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन कर सकता है. हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि सोने में बड़ी गिरावट तय है. केंद्रीय बैंक अभी भी लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे कीमतों को मजबूत आधार मिलता रहेगा. ऐसे में सोने में बहुत बड़ी गिरावट आने की संभावना सीमित मानी जा रही है, लेकिन पहले जैसी लगातार तेज बढ़त की उम्मीद भी कम है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की क्या है राय
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की मिड-ईयर आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा स्तर पर सोने की कीमतें वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के हिसाब से संतुलित मानी जा रही हैं. रिपोर्ट का अनुमान है कि निकट भविष्य में सोना सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है. हालांकि यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो कीमतों में फिर उछाल आ सकता है और सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. वहीं यदि मौजूदा स्तर से कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की और गिरावट आती है, तो इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक खरीदारी का अवसर माना जा सकता है.