फ्लेवर्ड स्पिरिट को लेकर चल रहे विवाद के बीच शराब कंपनियों को फिलहाल राहत मिली है. FSSAI ने पहले से तैयार स्टॉक बेचने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी है. हालांकि, कंपनियों को उत्पाद में इस्तेमाल किए गए अतिरिक्त फ्लेवर की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी और लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन करना होगा.
FSSAI के फैसले के बाद कंपनियों को पहले से तैयार फ्लेवर्ड स्पिरिट का स्टॉक बाजार में निकालने का मौका मिलेगा. इसके लिए 90 दिनों की अवधि तय की गई है. हालांकि बिक्री शुरू करने से पहले कंपनियों को सार्वजनिक नोटिस जारी करना होगा. इसमें साफ बताना होगा कि संबंधित पेय में अतिरिक्त फ्लेवर या फ्लेवर्ड स्पिरिट का इस्तेमाल किया गया है. यानी राहत मिली है, लेकिन उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक पहचान बताने की जिम्मेदारी कंपनियों पर ही रहेगी.
नियामक की मुख्य चिंता उत्पाद की पहचान और उसकी लेबलिंग को लेकर है. अगर किसी रम या व्हिस्की जैसे पेय में बाहर से फ्लेवर मिलाया गया है, तो उसे सामान्य रम या व्हिस्की के नाम से पेश नहीं किया जा सकता. ऐसे उत्पादों को ‘Rum-flavoured Spirit’ या ‘Whisky-flavoured Spirit’ जैसे नाम से बेचना होगा. पैकेजिंग के सामने वाले हिस्से पर भी इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी, ताकि ग्राहक खरीदारी के समय सही जानकारी हासिल कर सके.
मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति का मतलब यह नहीं है कि कंपनियों के खिलाफ नियामकीय जांच खत्म हो गई है. Age Claim पर रोक बरकरार रहेगी. इसके अलावा कंपनियों के परिसरों में स्वच्छता और अन्य खाद्य सुरक्षा मानकों से जुड़े निरीक्षण जारी रहेंगे. FSSAI का रुख यह है कि पेय पदार्थों में फ्लेवर का इस्तेमाल अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन उसके इस्तेमाल की जानकारी और उत्पाद की सही पहचान उपभोक्ता से छिपाई नहीं जानी चाहिए.
FSSAI का यह फैसला संबंधित उद्योग संगठन के साथ बैठक के बाद सामने आया है. इससे UB Spirits और Associated Alcohols & Breweries जैसी कंपनियों को तैयार माल की बिक्री के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है. विवाद तब सामने आया था, जब बाजार में मौजूद रम और व्हिस्की के नमूनों की जांच में ऐसे फ्लेवर मिलने की बात सामने आई, जो वास्तविक पेय जैसी खुशबू और स्वाद देने के लिए इस्तेमाल किए गए थे. अब कंपनियों को स्टॉक बेचने का रास्ता तो मिला है, लेकिन सही लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा.