नई दिल्ली: शेयर बाजार में हाल ही में लागू किए गए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर निवेशकों और बाजार के कुछ हिस्सेदारों की चिंताओं पर सेबी ने स्थिति स्पष्ट की है. सेबी चीफ पांडे ने कहा है कि नए सिस्टम को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. नियामक निवेशकों और अन्य स्टेकहोल्डर्स से मिलने वाले फीडबैक पर लगातार नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जाएंगे.
नए नियम के तहत शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने से पहले 20 मिनट का अलग क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू किया गया है. इस दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर जमा किए जाते हैं और ऐसा भाव तय करने की कोशिश होती है, जिस पर अधिकतम वॉल्यूम में सौदे हो सकें.
पहले किसी शेयर का क्लोजिंग प्राइस दिन के अंतिम 30 मिनट में हुए कारोबार की औसत कीमत के आधार पर तय किया जाता था. नए CAS सिस्टम का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और बड़े ऑर्डर्स के लिए बेहतर तरीके से कीमत निर्धारित करना है.
नया सिस्टम लागू होने के बाद कुछ बाजार भागीदारों ने चिंता जताई कि इससे बाजार में भागीदारी प्रभावित हो रही है और कुछ निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. सेबी चीफ ने कहा कि नियामक इन चिंताओं और बाजार में सामने आ रहे बदलावों का अध्ययन कर रहा है.
उन्होंने यह भी माना कि ट्रेडर्स के लिए इंडिकेटिव प्राइस काफी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज यानी PMS से जुड़े कुछ मुद्दों की भी पहचान की गई है, जिन्हें दूर करने पर काम किया जा रहा है.
सेबी का कहना है कि CAS व्यवस्था को खत्म करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. हालांकि सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं. नियामक अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के साथ सोशल मीडिया पर सामने आ रही चर्चाओं को भी देख रहा है.
सेबी के मुताबिक, 3 अगस्त को सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती तौर पर जो विसंगतियां और उतार-चढ़ाव देखने को मिले थे, वे अब काफी कम हुए हैं. नियामक का मानना है कि इस व्यवस्था में मुख्य चुनौती पारदर्शिता से ज्यादा नए सिस्टम को समझने और अपनाने की है.
पुराने ट्रेडिंग सिस्टम और एल्गोरिदम को नए क्लोजिंग ऑक्शन मॉडल के अनुरूप ढलने में कुछ समय लग सकता है. इस बीच कई बड़े ब्रोकर्स ने अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर इंडिकेटिव प्राइस दिखाना शुरू कर दिया है. इससे ट्रेडर्स को क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान संभावित कीमत का अंदाजा लगाने और बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है.