यूरोपीय संघ से FTA डील के बाद भारत को फायदा ही फायदा, 'मदर ऑफ ऑल डील्स' से ट्रंप को लगेगा तगड़ा झटका!

भारत और यूरोप संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल हो चुका है. ट्रंप के बढ़ते टैरिफ दवाब के बीच यह डील भारत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. आइए जानते हैं कि इस डील से किस क्षेत्र को ज्यादा फायदा मिलेगा.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: भारत ने यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट डील तय कर लिया है. इसका ऐलान भी 27 जनवरी को होने जा रहा है. इस एग्रीमेंट के तहत दोनों अपने देश के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाएंगे. भारत में यूरोप के सामान टैरिफ के बिना आएंगे, वहीं भारतीय सामानों को भी यूरोपीय संघ में बिना टैरिफ के लाया जाएग. इस डील से दोनों को फायदा मिलने की संभावना है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया पर टैरिफ का बोझ डाल दिया है. जिसकी वजह से कई देश आपस में समझौते करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी क्रम में FTA  के तहत भारत और यूरोप ने डील फाइनल कर ली है, जिसका फायदा भी दोनों को मिलने वाला है. 

भारत और यूरोप के बीच व्यापार

भारत और EU के बीच साल 2024–25 में लगभग 136.5 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था. इसमें भारत का निर्यात 75.8 अरब डॉलर और आयात 60.7 अरब डॉलर रहा. FTA लागू होने के बाद भारत का निर्यात तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. यूरोपीय संघ 450 मिलियन से अधिक आबादी और करीब 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला विशाल बाजार है. अनुमान है कि इस डील के बाद भारत–EU व्यापार 136 अरब डॉलर से बढ़कर 200 से 250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. इस डील से भारत और यूरोप को फायदा होगा, वहीं अमेरिकी बाजार को झटका लग सकता है.

इन क्षेत्रों को मिलेगी मजबूती

FTA डील से यूरोप को भारत के रूप में एक भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर मिलेगा. जबकि भारत को अमेरिका के विकल्प के तौर पर एक बड़ा और स्थिर बाजार हासिल होगा. रक्षा क्षेत्र में भी यूरोप भारत से हथियार और रक्षा उपकरण आयात करने की संभावनाएं तलाश रहा है. इस डील की मदद से टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फार्मा, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी और सर्विस सेक्टर को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

इसके अलावा रक्षा उत्पादन में भी भारत की हिस्सेदारी यूरोप में बढ़ सकती है. कम टैरिफ के चलते यूरोप से कच्चा माल सस्ते में भारत आएगा, जिससे उत्पादन लागत घटेगी. इस समझौते से मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, डिजिटल सर्विस, लॉजिस्टिक्स और MSME सेक्टर में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. भारत लंबे समय से चीन के विकल्प की तलाश में है. यूरोप के साथ यह डील भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन दे सकती है.