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28 की उम्र में EPF से निकाले 1 लाख रुपये तो रिटायरमेंट तक हो सकता है 11.78 लाख का नुकसान!

ईपीएफ से कम उम्र में निकाली गई छोटी रकम भी रिटायरमेंट के समय बड़े नुकसान में बदल सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार 28 साल की उम्र में निकाले गए 1 लाख रुपये भविष्य में लगभग 11.78 लाख रुपये के संभावित रिटायरमेंट फंड को कम कर सकते हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
28 की उम्र में EPF से निकाले 1 लाख रुपये तो रिटायरमेंट तक हो सकता है 11.78 लाख का नुकसान!
Courtesy: ai generated

अक्सर लोग अचानक आने वाले खर्चों को पूरा करने के लिए अपने ईपीएफ खाते से पैसा निकाल लेते हैं. उस समय यह फैसला आसान और जरूरी लग सकता है लेकिन इसका असर भविष्य की वित्तीय सुरक्षा पर काफी बड़ा पड़ सकता है. वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ईपीएफ केवल बचत का साधन नहीं, बल्कि लंबी अवधि में रिटायरमेंट फंड तैयार करने का मजबूत माध्यम है. इसमें मिलने वाला ब्याज और उस पर मिलने वाला अतिरिक्त ब्याज समय के साथ धन को तेजी से बढ़ाता है. यही वजह है कि समय से पहले निकासी भविष्य के बड़े फंड को कमजोर कर सकती है.

चक्रवृद्धि की ताकत को समझना जरूरी

ईपीएफ में जमा धन पर हर साल ब्याज मिलता है और अगले वर्षों में यह ब्याज भी कमाई करने लगता है. इसी प्रक्रिया को चक्रवृद्धि या कंपाउंडिंग कहा जाता है. शुरुआत में वृद्धि सामान्य दिखाई देती है, लेकिन समय बीतने के साथ रिटर्न की रफ्तार बढ़ती जाती है. यही कारण है कि लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय बड़ा फंड मिलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कंपाउंडिंग का फायदा तभी मिलता है जब निवेश को बिना छेड़े लंबे समय तक बढ़ने दिया जाए. बीच में निकासी करने से यह प्रक्रिया बाधित होती है और भविष्य का संभावित रिटर्न कम हो जाता है.

1 लाख रुपये की निकासी का बड़ा असर

फिनटेक प्लेटफॉर्म कस्टोडियन लाइफ के संस्थापक कुणाल काबरा के अनुसार, कम उम्र में की गई ईपीएफ निकासी रिटायरमेंट फंड पर स्थायी प्रभाव छोड़ सकती है. उनके मुताबिक यदि कोई कर्मचारी 28 वर्ष की उम्र में अपने ईपीएफ खाते से 1 लाख रुपये निकालता है, तो रिटायरमेंट तक पहुंचते-पहुंचते उसे लगभग 11.78 लाख रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निकाली गई राशि आने वाले कई दशकों तक कंपाउंडिंग का लाभ नहीं ले पाती. जितनी जल्दी निकासी होगी, उसका असर उतना ही अधिक दिखाई देगा.

उदाहरण से समझें पूरा गणित

काबरा ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई कर्मचारी 23 वर्ष की उम्र से ईपीएफ में निवेश शुरू करता है और 58 वर्ष तक योगदान जारी रखता है, तो लंबी अवधि में बड़ी पूंजी तैयार हो सकती है. मान लें कि पहले 10 वर्षों तक हर महीने 5,000 रुपये, अगले 10 वर्षों तक 10,000 रुपये, फिर 10 वर्षों तक 20,000 रुपये और अंतिम 5 वर्षों तक 25,000 रुपये का योगदान किया जाए. मौजूदा 8.25 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर रिटायरमेंट के समय यह फंड लगभग 2.11 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. लेकिन बीच में निकासी करने पर यही लक्ष्य कमजोर पड़ जाता है.

ईपीएफ को आपातकालीन बचत न समझें

विशेषज्ञों का मानना है कि ईपीएफ खाते को सामान्य बचत खाते की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. यह रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए बनाया गया निवेश साधन है. उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति 28 साल की उम्र में 5 लाख रुपये निकाल लेता है तो रिटायरमेंट तक उसका संभावित नुकसान करीब 60 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. इसलिए केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही निकासी पर विचार करना चाहिए. वित्तीय अनुशासन और लंबे समय तक निवेश बनाए रखना ही ईपीएफ से अधिकतम लाभ लेने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है.