Import Duty Cut: त्योहारों से पहले सरकार का बड़ा तोहफा, खाने के तेल पर घटाई इंपोर्ट ड्यूटी; अब नहीं बिगड़ेगा रसोई का बजट

फेस्टिव सीजन शुरू होने से ठीक पहले सरकार ने आम लोगों को राहत देने वाला बड़ा फैसला लिया है. खाद्य तेलों पर लगने वाले आयात शुल्क में कटौती कर दी गई है, जिससे पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी तेल की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद जताई जा रही है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: त्योहारों की रौनक शुरू होने वाली है और ठीक इसी बीच रसोई के बजट को लेकर लोगों की चिंता कम करने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के बीच मोदी सरकार ने कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों पर लगने वाले मूल आयात शुल्क में सीधी कटौती कर दी है.

इस फैसले का असर आने वाले हफ्तों में बाजार में साफ दिखने की उम्मीद है, क्योंकि यह ठीक उस समय लिया गया है जब त्योहारी सीजन में तेल की खपत सबसे ज्यादा बढ़ती है. सरकार का मकसद साफ है कि आम आदमी की थाली पर महंगाई का बोझ न पड़े.

कच्चे तेल पर शुल्क लगभग आधा

सरकारी अधिसूचना के अनुसार कच्चे पाम तेल और कच्चे सोया तेल पर लगने वाला आयात शुल्क अब 10 फीसदी से घटाकर सीधे 5 फीसदी कर दिया गया है. वहीं रिफाइंड पाम तेल और सोया तेल पर यह शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी किया गया है. यानी आयातकों के लिए यह तेल अब पहले से सस्ता पड़ेगा, जिसका असर सीधे बाजार भाव पर पड़ सकता है.


सूरजमुखी तेल को मिली सबसे बड़ी राहत

इस कटौती में सबसे ज्यादा फायदा सूरजमुखी तेल को मिला है. कच्चे सूरजमुखी तेल पर पहले लगने वाला 10 फीसदी शुल्क अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर भी शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी कर दिया गया है. कच्चे ताड़ और कच्चे सोयाबीन तेल पर अब कुल शुल्क 11 फीसदी रहेगा, जो पहले 16.5 फीसदी था.

एक साल में तेल हुआ 20 फीसदी महंगा

पिछले एक साल के दौरान देश में वनस्पति तेल की कीमतों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसी वजह से सरकार का यह कदम अहम माना जा रहा है, क्योंकि सितंबर से नवंबर तक चलने वाले प्रमुख त्योहारों में मिठाई, नमकीन और तले हुए पकवानों की मांग सबसे ज्यादा रहती है. शुल्क घटने से इन उत्पादों की लागत में भी कमी आ सकती है.

दो तिहाई जरूरत विदेशों से होती है पूरी

भारत अपनी वनस्पति तेल की करीब दो तिहाई जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है. इसके लिए देश मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन जैसे देशों पर निर्भर रहता है. यही वजह है कि आयात शुल्क में हुई यह कटौती सीधे घरेलू बाजार की कीमतों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है.

कारोबारियों को भी दिखी बड़ी उम्मीद

उद्योग जगत ने भी इस फैसले का स्वागत किया है. एक बड़ी खाद्य तेल कंपनी के अधिकारी के मुताबिक इस कटौती से सूरजमुखी तेल को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा, जिससे यह रिफाइनरियों के लिए पहले से ज्यादा आकर्षक विकल्प बन जाएगा. इसका असर यह भी हो सकता है कि आने वाले समय में सोयाबीन और ताड़ के तेल की मांग में हल्की कमी देखने को मिले, जबकि सूरजमुखी तेल की खपत बढ़ सकती है.