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मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली मानी जा रही है. हाल के दिनों में एफआईआई ने बड़ी मात्रा में शेयरों की बिक्री की है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया

Anuj
Edited By: Anuj
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
Courtesy: Chat GPT

नई दिल्ली: बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान निवेशकों की चिंता साफ नजर आई और प्रमुख सूचकांक भारी नुकसान के साथ बंद हुए. दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 1300 अंक से ज्यादा टूटकर 76,863 के स्तर पर आ गया.

वहीं, निफ्टी भी 394 अंक फिसलकर लगभग 23,866 के आसपास बंद हुआ. बाजार में गिरावट का असर ज्यादातर सेक्टरों पर देखने को मिला और कई प्रमुख शेयर लाल निशान में बंद हुए.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली मानी जा रही है. हाल के दिनों में एफआईआई ने बड़ी मात्रा में शेयरों की बिक्री की है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ खरीदारी की, लेकिन विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के सामने उसका असर कम पड़ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के चलते विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं.

मुनाफावसूली से बढ़ा दबाव

पिछले कुछ समय में बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी. इस तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी. इसके कारण कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई. ऑटो, बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर के शेयरों पर खास तौर पर दबाव देखने को मिला. महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फाइनेंस जैसे बड़े शेयरों में करीब 3 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई.

मिडिल ईस्ट तनाव का असर

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों में भी दिखाई दे रहा है. निवेशकों को आशंका है कि यदि यह तनाव लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है.

एक्सपर्ट ने क्या बताया?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी निवेशक दोबारा खरीदारी शुरू करते हैं तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है. फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है.