ATF पर बड़ा यू-टर्न! सरकार के हस्तक्षेप के बाद कुछ ही घंटों में तेल कंपनियों ने घटाई कीमतें

एटीएफ की कीमतों में अचानक 100% से ज्यादा बढ़ोतरी के बाद तेल कंपनियों ने यू-टर्न ले लिया है. सरकार के हस्तक्षेप के बाद कीमतों में बड़ी कटौती कर दी गई है. अब घरेलू उड़ानों पर बोझ बहुत कम रहेगा, जबकि मुंबई में ATF सबसे सस्ती होगी.

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Kuldeep Sharma

एटीएफ (विमान ईंधन) की कीमतों को लेकर मचा हंगामा कुछ घंटों में ही शांत हो गया. तेल कंपनियों ने पहले एटीएफ के दाम 96 हजार से बढ़ाकर 2.7 लाख रुपये प्रति किलोलीटर कर दिए थे, जिससे आम लोगों में हवाई यात्रा महंगी होने की आशंका बढ़ गई थी. लेकिन पेट्रोलियम और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनियों ने यू-टर्न ले लिया. अब कीमतों में सिर्फ 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी रखी गई है. दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में नई कीमतें जारी कर दी गई हैं. इस फैसले से घरेलू एयरलाइंस और यात्रियों को बड़ी राहत मिली है.

सरकार का हस्तक्षेप

पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण एटीएफ की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने वाली थीं. लेकिन घरेलू यात्रा को सस्ता रखने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श कर केवल आंशिक बढ़ोतरी का फैसला लिया गया. सिर्फ 15 रुपये प्रति लीटर के आसपास बढ़ोतरी की गई है. इससे घरेलू एयरलाइंस पर बोझ बहुत कम पड़ेगा. विदेशी उड़ानों के लिए हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार दरें ही लागू होंगी.

नई कीमतें कितनी हुईं

सरकार के हस्तक्षेप के बाद नई कीमतें इस प्रकार हैं: दिल्ली में 1,04,927 रुपये प्रति किलोलीटर, कोलकाता में 1,09,450 रुपये, चेन्नई में 1,09,873 रुपये और मुंबई में सबसे कम 98,247 रुपये प्रति किलोलीटर. मुंबई में कीमत सबसे कम होने से यहां की उड़ानों पर सबसे कम असर पड़ेगा. पहले की गई भारी बढ़ोतरी को वापस ले लिया गया है, जिससे आम यात्रियों को राहत मिली है. 

घरेलू एयरलाइंस को राहत

घरेलू एयरलाइंस के लिए बढ़ोतरी को मात्र 8.5 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है. अन्य ऑपरेटर्स (नॉन-शेड्यूल्ड, चार्टर आदि) को पूरी बढ़ोतरी चुकानी होगी. इससे घरेलू उड़ानों का किराया ज्यादा नहीं बढ़ेगा. उद्योग सूत्रों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बावजूद सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है. इससे आम लोगों को हवाई सफर महंगा पड़ने से बचाया जा सकेगा.

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के अनुसार तय होती हैं कीमतें

एटीएफ की कीमतें दो दशक पहले ही नियंत्रण मुक्त कर दी गई थीं और ये अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के अनुसार तय होती हैं. लेकिन इस बार सरकार ने विशेष स्थिति को देखते हुए 'कैलिब्रेटेड अप्रोच' अपनाया. विदेशी एयरलाइंस को बाजार दर पर भुगतान करना होगा, जबकि घरेलू उड़ानों को राहत दी गई है. यह फैसला यात्रियों के हित में लिया गया है और हवाई यात्रा को किफायती बनाए रखने में मददगार साबित होगा.