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प्राइवेट या सरकारी? फ्रॉड के मामले में ये बैंक हैं टॉप पर, RBI ने जारी किए आंकड़े

Bank Fraud Data 2025: भारतीय रिजर्व बैंक ने खुलासा किया है कि बैंक स्कैम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. मार्च 2025 को खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में, रिपोर्ट किए गए स्कैम का मूल्य बढ़कर ₹36,014 करोड़ हो गया है.

Shilpa Srivastava

Bank Fraud Data 2025: भारतीय रिजर्व बैंक ने खुलासा किया है कि बैंक स्कैम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. मार्च 2025 को खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में, रिपोर्ट किए गए स्कैम का कुल मूल्य बढ़कर ₹36,014 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल रिपोर्ट किए गए ₹12,230 करोड़ से लगभग तीन गुना ज्यादा है. यह उछाल खासतौर से स्कैम को कैटेगराइज करने के तरीके में बदलाव और कुछ पुराने मामलों की नई रिपोर्ट के चलते हुआ है. 

भले ही इसमें शामिल धनराशि में बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन स्कैम के मामलों की संख्या 2023-24 में 36,060 से घटकर 2024-25 में 23,953 हो गई. इनमें से लगभग 59% मामलों के लिए निजी बैंक जिम्मेदार थे.

आरबीआई ने जारी की रिपोर्ट: 

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक बैंकों ने ₹25,667 करोड़ के स्कैम की सूचना दी, जो पिछले साल ₹9,254 करोड़ की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी है. प्राइवेट बैंकों ने 14,233 मामले दर्ज किए, जबकि सार्वजनिक बैंकों ने 6,935 मामले दर्ज किए.

स्कैम का ज्यादातर पैसा लोन से जुड़ा था. इनकी राशि ₹33,148 करोड़ थी, जो पिछले साल दर्ज किए गए ₹10,072 करोड़ से काफी ज्यादा थी. हालांकि, कार्ड और इंटरनेट से जुड़े स्कैम ₹1,457 करोड़ से घटकर ₹520 करोड़ रह गए. आरबीआई ने बताया कि इस बढ़ोतरी का एक हिस्सा ₹18,674 करोड़ के 122 पुराने स्कैम मामलों से आया, जिन्हें मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिर से कैटेगराइज किया गया और फिर से रिपोर्ट किया गया.

सबसे ज्यादा स्कैम के मामले किए दर्ज: 

डाटा के अनुसार, सार्वजनिक बैंकों ने ज्यादा पैसे गंवाए. कार्ड और इंटरनेट स्कैम ज्यादातर प्राइवेट बैंकों में हुई, जबकि सार्वजनिक बैंकों को लोन स्कैम में ज्यादा नुकसान हुआ.इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि बैंकों ने ₹1.12 लाख करोड़ से जुड़े 783 मामलों को वापस ले लिया क्योंकि उन्होंने सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया. बैंकिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए, आरबीआई बैंकों के लिए मजबूत लिक्विडिटी चेक पर काम कर रहा है. ये चेक बैंकों को वित्तीय समस्याओं के दौरान स्टेबल रहने और ग्राहकों की सुरक्षित रहने में मदद करेंगे. इसके साथ ही आरबीआई निजी और छोटे बैंकों के लिए नए नियमों भी बनाने पर काम कर रहा है जिससे डिजिटल सर्विस को बेहतर किया जा सके.