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1 लाख करोड़ के पार पहुंचा अमूल का टर्नओवर, यूरोप-US में भी भारतीय दूध की धूम

अमूल ने वित्त वर्ष 2026 में 1 लाख करोड़ रुपये के टर्नओवर का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है. 11% की शानदार वृद्धि के साथ ब्रांड ने न केवल भारत, बल्कि यूरोप और अमेरिका जैसे वैश्विक बाजारों में भी अपनी धाक जमाई है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भारतीय डेयरी सेक्टर में आज एक नया इतिहास रचा गया है. देश के चहेते ब्रांड 'अमूल' ने वित्त वर्ष 2026 में 1 ट्रिलियन (1 लाख करोड़) रुपये के टर्नओवर का जादुई आंकड़ा पार कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 11 प्रतिशत की इस दमदार बढ़ोतरी के पीछे ब्रांड की घरेलू बाजारों में गहरी पैठ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए विस्तार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अमूल अब केवल भारतीय रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप और अमेरिका में भी अपनी ताज़गी बिखेर रहा है.

अमूल के ब्रांड टर्नओवर के साथ-साथ गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) ने भी 73,450 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया है. पिछले साल के 65,911 करोड़ के मुकाबले इसमें 11.4% की वृद्धि हुई है. इस उछाल ने GCMMF को भारत का सबसे बड़ा FMCG संगठन बना दिया है. फेडरेशन के 1,200 से अधिक उत्पादों का विशाल पोर्टफोलियो और मजबूत वितरण नेटवर्क ही आज उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम साबित हो रहा है.

36 लाख किसानों की मेहनत का फल 

GCMMF के अध्यक्ष अशोकभाई चौधरी ने इस ऐतिहासिक सफलता को देश के किसानों को समर्पित किया है. उन्होंने कहा कि 1 लाख करोड़ का टर्नओवर पार करना न केवल करोड़ों उपभोक्ताओं के भरोसे का प्रतीक है, बल्कि हमारे 36 लाख डेयरी किसानों की दिन-रात की कड़ी मेहनत का परिणाम भी है. यह सफलता दर्शाती है कि जब छोटे उत्पादक एकजुट होते हैं, तो वे दुनिया के सबसे बड़े ब्रांडों को टक्कर देने की ताकत रखते हैं.

सहकारिता की भावना और आर्थिक लोकतंत्र 

वाइस चेयरमैन गोवर्धनभाई धमेलिया ने इसे सहकारिता की सच्ची जीत बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि 'अमूल मॉडल' आर्थिक लोकतंत्र का एक कालजयी ब्लूप्रिंट है. इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर हमने यह सिद्ध कर दिया है कि सामूहिक प्रयास से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है. यह 1 लाख करोड़ का मील का पत्थर केवल मुनाफा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का एक ठोस प्रमाण है.

वैश्विक मंच पर भारतीय किसानों की दस्तक 

अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जयेन मेहता ने ब्रांड के ग्लोबल विजन पर रोशनी डाली. उन्होंने स्पष्ट किया कि हम केवल व्यापार नहीं बढ़ा रहे, बल्कि यह दिखा रहे हैं कि किसानों की संस्था आधुनिक युग में क्या कुछ हासिल कर सकती है. यूरोप और अमेरिका में फ्रेश मिल्क लॉन्च करना इसी दिशा में एक साहसी कदम था. हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्लोबल ट्रेड और आधुनिक तकनीक का सीधा लाभ हमारे असली उत्पादकों को मिले.

आधुनिक उपभोक्ताओं के साथ तालमेल 

अमूल की इस छलांग के पीछे 18 सदस्य जिला सहकारी समितियों और स्थानीय बाजार की सटीक समझ का बड़ा योगदान है. बाजार की उभरती मांग के अनुरूप खुद को ढालने की अमूल की क्षमता ही उसे डेयरी जगत का बेताज बादशाह बनाती है. ब्रांड आइडेंटिटी और प्रभावी वितरण प्रणाली के मेल ने अमूल को घर-घर की पसंद बना दिया है, जिससे भविष्य में भी इसी तरह की दमदार और टिकाऊ वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं.