नई दिल्ली: दुनिया एक बार फिर अनिश्चितता और भय के दौर से गुजर रही है. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी, यूक्रेन में रूस का युद्ध और वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को हिला रहा है. इसी बीच, एक सदी पहले की गई एक भयावह भविष्यवाणी फिर से चर्चा में है, जो मानवता को बड़े पैमाने पर विनाश और प्रलय जैसे हालात की चेतावनी देती है. आज के हालात उस चेतावनी को और भी प्रासंगिक बना रहे हैं.
करीब सौ साल पहले वादा किए गए मसीहा और इमाम महदी से जुड़ी भविष्यवाणियों में दुनिया को झकझोर देने वाली घटनाओं का जिक्र किया गया था. इनमें वैश्विक संघर्ष, भारी तबाही और ऐसी आपदाओं की बात कही गई थी जो सामान्य समझ से परे हों. इन चेतावनियों में कहा गया था कि आने वाला समय मानव इतिहास का सबसे कठिन दौर साबित हो सकता है.
भविष्यवाणी में बार बार भूकंपों का उल्लेख मिलता है. आधुनिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित नहीं हो सकता. कई लोग इसे परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जोड़कर देखते हैं. चेतावनी में कहा गया था कि अमेरिका, यूरोप और एशिया में ऐसी घटनाएं होंगी जो पूरी सभ्यता को हिला देंगी.
इन भविष्यवाणियों में बड़े पैमाने पर मौत, खून की नदियों और प्रकृति के विनाश का डरावना चित्र खींचा गया है. इसमें कहा गया कि इंसान ही नहीं, बल्कि पशु और पक्षी भी इस तबाही से नहीं बच पाएंगे. कई शहर और बस्तियां इस तरह नष्ट हो जाएंगी जैसे वे कभी अस्तित्व में ही न रही हों.
आज जब दुनिया पहले से ही कई संघर्षों से जूझ रही है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चेतावनियां चिंता को और गहरा कर रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में एआई मॉडल्स ने कहा है कि तीसरे विश्व युद्ध का खतरा ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. परमाणु समझौते टूट रहे हैं और कई भू राजनीतिक फ्लैशपॉइंट उभर चुके हैं.
एआई विश्लेषण के मुताबिक दुनिया एक नए शीत युद्ध के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जिसे महान शक्ति राजनीति का युग कहा जा रहा है. यह चेतावनी डूम्सडे क्लॉक के अपडेट से ठीक पहले आई है, जो मानवता द्वारा खुद पैदा की गई वैश्विक तबाही की नजदीकी को दर्शाती है. यह संकेत साफ है कि दुनिया बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है.