राखी बांधने से पहले भद्रा का क्यों रखा जाता है ध्यान, जानें रावण से जुड़ी है बड़ी मान्यता
रक्षाबंधन पर भद्रा काल में राखी न बांधने की परंपरा हिंदू धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है. भद्रा को पंचांग का विष्टि करण माना जाता है और इसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता.
नई दिल्ली: रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का त्योहार है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना करती है. भाई भी बहन की रक्षा का वचन देता है. यही वजह है कि राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है. हिंदू पंचांग में राखी बांधने से पहले भद्रा काल का ध्यान रखा जाता है.
मान्यता है कि भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं होता. इसके पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा बताई जाती है. कथा के अनुसार, रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में रावण को राखी बांधी थी. इसके कुछ समय बाद लंका के राजा रावण का अंत हो गया. इसी लोक मान्यता के आधार पर कहा जाता है कि भद्रा के दौरान भाई को राखी बांधने से बचना चाहिए.
रावण और शूर्पणखा से जुड़ी कहानी
हालांकि, रावण और शूर्पणखा से जुड़ी यह कहानी धार्मिक मान्यता और लोककथा के रूप में प्रचलित है. इसे ऐतिहासिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाता. धार्मिक परंपरा में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त समय नहीं माना जाता है.
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पुराणों में क्या हैं मान्यताएं?
भद्रा को लेकर पुराणों में भी अलग मान्यताएं मिलती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन मानी जाती हैं. उनका स्वभाव उग्र बताया गया है. कहा जाता है कि उनके प्रभाव के दौरान मांगलिक कार्यों में बाधा आ सकती है. इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों की तरह रक्षाबंधन पर भी भद्रा काल से बचने की परंपरा है.
दरअसल, भद्रा कोई व्यक्ति नहीं बल्कि पंचांग में आने वाला एक विशेष काल है. ज्योतिष और हिंदू पंचांग में इसे विष्टि करण कहा जाता है. करण तिथि के आधे हिस्से को कहा जाता है और विष्टि करण को ही सामान्य रूप से भद्रा कहा जाता है. यह समय हर दिन एक जैसा नहीं होता और अलग अलग तिथियों के अनुसार बदलता रहता है.
भद्रा की गणना क्यों है महत्वपूर्ण?
रक्षाबंधन पर भद्रा की गणना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि राखी बांधने को धार्मिक दृष्टि से मांगलिक कार्य माना जाता है. परंपरा के अनुसार बहन को भद्रा समाप्त होने के बाद ही भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए. इसके लिए उस वर्ष के पंचांग में दिए गए भद्रा समाप्त होने के समय और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त को देखा जाता है.
रक्षाबंधन केवल एक धागा बांधने की रस्म नहीं है. इसमें भाई बहन के बीच प्रेम, विश्वास, आशीर्वाद और जिम्मेदारी की भावना जुड़ी होती है. इसलिए शुभ समय का ध्यान रखने की परंपरा इस त्योहार की धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है.