मालिक या किराएदार? जानें किराए के घर में वास्तु दोष का असर किस पर पड़ता है

वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में व्यक्ति रहता है, वहां की ऊर्जा का सबसे अधिक प्रभाव उसी पर पड़ता है. इसलिए यदि किराए के मकान में वास्तु दोष हैं, तो उनका असर मुख्य रूप से किराएदार पर माना जाता है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: वास्तु शास्त्र में घर की दिशा, बनावट और ऊर्जा को जीवन पर प्रभाव डालने वाला माना जाता है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि यदि किराए के मकान में वास्तु दोष हो, तो उसका प्रभाव मकान मालिक पर होगा या वहां रहने वाले किराएदार पर. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार जिस व्यक्ति का अधिक समय उस घर में बीतता है, उस पर वहां की ऊर्जा का प्रभाव अधिक माना जाता है. हालांकि यह पारंपरिक मान्यता है और इसके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.

मान्यता के अनुसार यदि किराए के मकान में रसोई सही दिशा में नहीं बनी हो, तो परिवार के सदस्यों को मानसिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों या दैनिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसी तरह यदि शयनकक्ष में वास्तु दोष हो, तो नींद और वैवाहिक जीवन प्रभावित होने की बात कही जाती है. मुख्य द्वार में दोष होने पर जीवन में बाधाएं और आर्थिक नुकसान की संभावना मानी जाती है.

क्या है वास्तु विशेषज्ञों का मानना?

वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक का भी संपत्ति से एक स्थायी संबंध होता है, इसलिए कुछ प्रभाव उस पर भी पड़ सकता है. हालांकि घर में निवास करने के कारण किराएदार पर इसका प्रभाव अधिक माना जाता है. कई लोग इसे किराएदारों के बार बार बदलने या मकान से जुड़े विवादों से भी जोड़कर देखते हैं.


यदि कोई व्यक्ति नए किराए के घर में प्रवेश करने जा रहा है, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा घर में प्रवेश से पहले अच्छी तरह साफ सफाई करना, नमक मिले पानी से पोछा लगाना और जाले हटाना सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रतीक माना जाता है.

क्या है धार्मिक मान्यताएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर के मंदिर में पहले दिन शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना, कपूर से आरती करना और कुछ दिनों तक गूगल की धूनी देना शुभ माना जाता है. साथ ही घर में पानी के नल या पाइप से रिसाव न होने देने की भी सलाह दी जाती है. मान्यता है कि लगातार पानी टपकना शुभ नहीं माना जाता.

विशेषज्ञों का क्या है कहना?

विशेषज्ञों का कहना है कि घर चुनते समय केवल वास्तु ही नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्वच्छता, पर्याप्त रोशनी, हवा, पानी, बिजली और आसपास का वातावरण भी ध्यान में रखना चाहिए. किसी भी घर में सकारात्मक माहौल, आपसी प्रेम और स्वच्छता को सुखद जीवन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है. वास्तु से जुड़ी मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था पर आधारित हैं और इन्हें अपनाना या न अपनाना व्यक्ति के विश्वास पर निर्भर करता है.