23 साल बाद लौट रहा है सावन का दुर्लभ महासंयोग, जानिए कौन-सा सोमवार माना जा रहा है सबसे शुभ
सावन 2026 में भगवान शिव की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए तीसरा सोमवार बेहद खास माना जा रहा है. इस दिन नाग पंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है.
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस बार सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है और पूरे महीने में कई ऐसे धार्मिक संयोग बन रहे हैं, जिन्हें शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है. इनमें सबसे अधिक चर्चा सावन के तीसरे सोमवार की हो रही है. धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस दिन सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ मेल बन रहा है. मान्यता है कि ऐसा संयोग करीब 23 साल बाद देखने को मिल रहा है. यही वजह है कि इस दिन जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और शिव पूजा का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में अधिक माना जा रहा है.
23 साल बाद बन रहा है विशेष धार्मिक संयोग
सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी का पर्व पड़ रहा है. नाग पंचमी का संबंध भगवान शिव और नाग देवता दोनों से माना जाता है. इस दिन शिवलिंग पर जल और कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष संयोग में श्रद्धा से की गई पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. इसी कारण इस दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ रहने की संभावना रहती है.
काशी और उज्जैन में नाग पूजा का विशेष महत्व
नाग पंचमी के अवसर पर काशी और उज्जैन जैसे शिव नगरी क्षेत्रों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. काशी के नागकूप में स्थित नागेश्वर महादेव का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन नाग देवता और भगवान शिव की संयुक्त आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. इसी वजह से देशभर से श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.
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सिर्फ तीसरा सोमवार ही नहीं, दूसरे सोमवार का भी महत्व
आदर्श सेवा संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, इस वर्ष सावन के दूसरे सोमवार यानी 10 अगस्त को शिव प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है. इसके अगले दिन मंगला गौरी व्रत और सावन शिवरात्रि पड़ रही है. लगातार आने वाले ये धार्मिक पर्व शिव और शक्ति की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं.
ग्रहों की चाल भी बना रही है सावन को खास
सावन शुरू होने से पहले रविवार को मंगल का मिथुन राशि में गोचर होगा. वहीं 2 अगस्त को गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बनने की बात कही गई है. धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह योग शिव पूजा के लिए शुभ माना जाता है. मंगल के गोचर से मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए भी लाभ के अवसर बनने की संभावना जताई गई है.