Sawan 2026: कल से शुरू हो रहा है सावन, भूलकर भी न करें ये 10 गलतियां... नहीं तो महादेव हो सकते हैं रुष्ट
30 जुलाई 2026 से सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.
नई दिल्ली: 30 जुलाई 2026 से सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है. सनातन परंपरा में इस पूरे महीने को भगवान शिव की उपासना, संयम और सात्विक जीवन का विशेष समय माना जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में श्रद्धापूर्वक की गई शिव आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दौरान जीवनशैली में भी पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक कुछ ऐसे कार्य हैं, जिन्हें सावन में करने से बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
सात्विक भोजन को दिया जाता है विशेष महत्व
सावन के दौरान तामसिक भोजन से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है. लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अंडे जैसी चीजों का सेवन इस महीने में वर्जित माना जाता है. इसके साथ ही शराब और अन्य नशीले पदार्थों से भी दूर रहने की मान्यता है. धार्मिक दृष्टि से सात्विक भोजन मन और शरीर दोनों को शुद्ध रखने में सहायक माना गया है.
शिवलिंग पर ये चीजें अर्पित करने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर हल्दी और कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हें सुहाग से जुड़ी सामग्री माना गया है. इसी तरह तुलसी के पत्ते और केतकी का फूल भी भगवान शिव की पूजा में नहीं चढ़ाए जाते. इसके अलावा कटे-फटे या खंडित बेलपत्र अर्पित करना भी उचित नहीं माना जाता. पूजा में हमेशा साफ और पूर्ण बेलपत्र का ही प्रयोग करना चाहिए.
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दूध चढ़ाने से पहले रखें इस बात का ध्यान
भगवान शिव को दूध अर्पित करना शुभ माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार तांबे के बर्तन में रखा दूध शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए. दूध अर्पित करने के लिए पीतल, चांदी या स्टील के पात्र का उपयोग उचित माना जाता है. वहीं तांबे के पात्र से केवल जल अर्पित करने की परंपरा बताई गई है.
संयम और मधुर व्यवहार को दें प्राथमिकता
सावन के महीने में क्रोध, कटु वचन और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है. जीव-जंतुओं को कष्ट पहुंचाना भी उचित नहीं माना जाता, विशेष रूप से सांड और नाग को नुकसान पहुंचाने से बचने की बात कही गई है. इस दौरान भगवान शिव का स्मरण, मंत्र जाप और शांत व्यवहार अपनाने को श्रेष्ठ माना गया है.
इन आदतों से भी दूरी बनाने की सलाह
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में शरीर पर तेल लगाने, विशेषकर रविवार को तेल मालिश करने, बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने और नाखून काटने से बचने की सलाह दी जाती है. सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को दिन में अधिक सोने से भी बचना चाहिए. इसके अलावा बैंगन जैसी कुछ हरी सब्जियों के सेवन से भी परहेज करने की मान्यता है, जिसके पीछे धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों कारण बताए जाते हैं.
अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है. किसी भी धार्मिक नियम या मान्यता को अपनाने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें.