एक ही गर्भगृह में दो शिवलिंग, कभी नहीं सूखता जलकुंड... जानिए माउंट आबू के इस अनोखे शिव मंदिर की मान्यता
अगर आप सावन में किसी अनोखे शिव मंदिर के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो राजस्थान के माउंट आबू स्थित अग्नेश्वर महादेव मंदिर खास हो सकता है.
नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. अदि आप इस सावन किसी ऐसे मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, जहां आस्था के साथ एक अनोखी विशेषता भी जुड़ी हो, तो राजस्थान का अग्नेश्वर महादेव मंदिर आपके लिए खास हो सकता है. राजस्थान के माउंट आबू में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी अनूठी संरचना और धार्मिक मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है. यहां एक ही गर्भगृह में आमने-सामने दो शिवलिंग स्थापित हैं. यही विशेषता इसे देश के दुर्लभ शिव मंदिरों में शामिल करती है और हर साल सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है.
अरावली की वादियों में स्थित है प्राचीन मंदिर
अग्नेश्वर महादेव मंदिर राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित है. यह मंदिर देलवाड़ा से लगभग सात किलोमीटर दूर अरावली पर्वतमाला की शांत वादियों के बीच बना हुआ है. प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण यहां पूरे वर्ष श्रद्धालु आते हैं, जबकि सावन के महीने में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है.
एक ही गर्भगृह में विराजमान हैं दो शिवलिंग
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता एक ही गर्भगृह में आमने-सामने स्थापित दो शिवलिंग हैं. दोनों शिवलिंगों के साथ दो-दो शिव परिवार की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्यवस्था शिव और शक्ति के विशेष स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है. यही वजह है कि इस मंदिर का धार्मिक महत्व अन्य शिव मंदिरों से अलग माना जाता है.
स्कंद पुराण से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अग्नेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम के गुरु महर्षि विश्वामित्र और आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि ने इसी स्थान पर तपस्या की थी. इसी कारण यह मंदिर शिवभक्तों के साथ-साथ ऋषि परंपरा से जुड़ी आस्था का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है.
इस जलकुंड को माना जाता है चमत्कारी
मंदिर परिसर में स्थित पवित्र जलकुंड श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है. स्थानीय मान्यता है कि इस कुंड से कितना भी पानी निकाला जाए, इसका जल कभी समाप्त नहीं होता. इसी वजह से इसे चमत्कारी जलकुंड माना जाता है. श्रद्धालु इस जल को विशेष श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं और कई लोग इसे अपने घर भी ले जाते हैं.
सावन में बढ़ जाता है धार्मिक महत्व
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जलकुंड का पानी गंगा जल के समान पवित्र माना जाता है. यह भी विश्वास किया जाता है कि श्रद्धा के साथ इस जल का उपयोग करने से कई प्रकार के चर्म रोगों में लाभ मिल सकता है. सावन के दौरान यहां श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव से सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगते हैं.