नई दिल्ली: पंचक 2026 को लेकर धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि पंचक रक्षाबंधन से ठीक पहले शुरू होगा. पंचक 2026 का प्रभाव रक्षाबंधन के दिन भी रहेगा, इसलिए कई लोग शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर संशय में हैं. पंचांग के अनुसार यह पंचक चंद्रमा के विशेष नक्षत्रों में प्रवेश करने से बनता है और इसकी अवधि लगातार पांच दिनों तक मानी जाती है.
पंचांग के अनुसार अगस्त महीने में पंचक का प्रारंभ 27 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से होगा. इसका प्रभाव अगले दिन यानी 28 अगस्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. इसी कारण रक्षाबंधन के दिन पंचक का प्रभाव भी माना जाएगा. हालांकि इस बार पंचक गुरुवार से शुरू हो रहा है, जिसे ज्योतिष में अपेक्षाकृत कम हानिकारक माना गया है.
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा इन पांच नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तब पंचक बनता है.
इन नक्षत्रों की यात्रा पूरी होने तक पंचक का प्रभाव बना रहता है.
इस बार पंचक का समापन 1 सितंबर को होगा. इन पांच दिनों में चंद्रमा लगातार पांच अलग-अलग नक्षत्रों में भ्रमण करेगा. विशेष बात यह है कि 31 अगस्त को लगभग पूरे दिन पंचक का प्रभाव रहेगा, इसलिए उस दिन भी शुभ कार्यों को लेकर लोग पंचांग की सलाह लेते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक को पूरी तरह अशुभ नहीं माना जाता. इसका प्रभाव उस दिन पर भी निर्भर करता है, जिस दिन पंचक शुरू होता है.
पंचक के प्रकार;
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इन पांच दिनों में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है.
हालांकि पूजा-पाठ, रक्षाबंधन जैसे धार्मिक पर्व और दैनिक शुभ कर्म श्रद्धा के साथ किए जा सकते हैं. किसी भी महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य से पहले योग्य विद्वान या पंचांग की सलाह लेना उचित माना जाता है.
अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक मान्यताओं और प्रचलित धार्मिक कथाओं पर आधारित है. इसमें बताए गए कलयुग, कल्कि अवतार और युग परिवर्तन से जुड़े दावे धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं. अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इन विषयों को लेकर मतभेद हो सकते हैं.