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उत्तराखंड के नीब करौरी धाम को क्यों कहा जाता है ‘कैंची धाम’? जानें इसके पीछे छिपा ये 'राज'

कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर उत्तराखंड के नीब करौरी धाम को कैंची धाम क्यों कहा जाता है. चलिए आज जानते हैं इसके पीछे छिपा आखिर क्या राज है.

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Edited By: Antima Pal
Kainchi Dham
Courtesy: x

उत्तराखंड के नैनीताल और अल्मोड़ा के बीच बसा कैंची धाम एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. इसे नीब करौरी धाम भी कहते हैं. यहां नीब करौरी बाबा का आश्रम है, जो दुनिया भर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. लेकिन सवाल उठता है कि इसे 'कैंची धाम' क्यों कहा जाता है? क्या यहां कभी कैंची बनाने का कारखाना था? नहीं इस नाम की वजह कुछ और है. 
यह पहाड़ी सड़कों की खास बनावट से जुड़ी है. आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी सरल शब्दों में...

पहाड़ी इलाकों में सड़कें घुमावदार होती हैं. इनमें एक खास तरह का मोड़ होता है, जिसे 'हेयरपिन बेंड' कहते हैं. हिंदी में इसे 'कैंची मोड़' बोलते हैं. पुराने समय में गाड़ियों में पावर स्टीयरिंग नहीं होती थी. इंजन कमजोर होते थे और टर्निंग रेडियस बड़ा होता था. ऐसे में तेज मोड़ पर गाड़ी घुमाना मुश्किल था. 

उत्तराखंड के नीब करौरी धाम को क्यों कहा जाता है ‘कैंची धाम’?

मान लीजिए दो गाड़ियां ऐसे मोड़ पर आमने-सामने आ जाएं. दोनों को पास होने के लिए रॉन्ग साइड लेनी पड़ती थी. गाड़ियां एक-दूसरे को पार करतीं तो सड़क पर 'X' आकार बनता है. यह बिल्कुल कैंची की तरह लगता है. ऊपर से देखो तो दो ब्लेड क्रॉस हो रहे हों. इसी से ऐसे मोड़ों को 'कैंची मोड़' नाम मिला.

जानें इसके पीछे छिपा ये 'राज'

उत्तराखंड की सड़कों पर ऐसे कई मोड़ हैं. कैंची धाम ठीक उसी जगह है जहां सड़क दो बार खुद को काटती है. यह दो कैंची मोड़ पास-पास हैं. सड़क 'कैंची' के आकार में मुड़ती है. यही वजह है कि जगह का नाम 'कैंची' पड़ा. बाद में नीब करौरी बाबा ने यहां आश्रम बनाया. आश्रम के साथ मंदिर बना तो पूरा इलाका 'कैंची धाम' कहलाने लगा.

नीब करौरी बाबा एक संत थे. वे 20वीं सदी में हुए. बाबा चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध थे. लोग कहते हैं कि बाबा ने कई लोगों की मदद की. स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसे विदेशी भी यहां आए. बाबा का संदेश था – सबको प्रेम दो, सेवा करो. यहां हर साल 15 जून को मेला लगता है. लाखों लोग आते हैं. आज कैंची धाम सिर्फ धार्मिक जगह नहीं है. यहां प्रकृति सुंदर है, नदी बहती है, जंगल हैं. श्रद्धालु ध्यान करते हैं, भजन गाते हैं.