शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता और ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है. नवरात्रि के हर दिन अलग रंग पहनने की परंपरा भी प्रचलित है.
चौथे दिन रॉयल ब्लू रंग पहनना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि यह रंग आत्मविश्वास, शांति और स्थिरता का प्रतीक है.
गहरा नीला रंग शांति, भरोसे और स्थिरता से जुड़ा माना जाता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस दिन रॉयल ब्लू रंग के कपड़े पहनकर मां कूष्मांडा की आराधना कर सकते हैं.
महिलाएं रॉयल ब्लू रंग की साड़ी, सूट या सलवार पहन सकती हैं. वहीं पुरुष कुर्ता या अन्य पारंपरिक कपड़े पहन सकते हैं. अगर रॉयल ब्लू रंग के कपड़े उपलब्ध नहीं हैं, तो अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार दूसरे रंग के वस्त्र भी पहने जा सकते हैं.
मां कूष्मांडा देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में चौथी देवी मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी. इसी वजह से उन्हें सृष्टि की रचयिता के रूप में भी जाना जाता है. मां कूष्मांडा को ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि के चौथे दिन उनकी पूजा करने से भक्त सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं.
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें. इसके बाद मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. दीपक जलाकर मां को फूल, फल और भोग अर्पित करें. इसके बाद मां कूष्मांडा के मंत्र ‘ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः’ का जाप करें. पूजा के अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.